नयी दिल्ली, 19 जनवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों को मार्शल की मदद से बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा से बाहर कर दिया गया। वे अरविंद केजरीवाल सरकार की कथित “ किसान विरोधी” नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
विधानसभा के सत्र के चौथे दिन के पूर्वार्ध में सदन की कार्यवाही बार बार स्थगित हुई। पहले यह दोपहर में बारह बज कर पंद्रह मिनट तक, फिर बारह बज कर तीन मिनट तक और फिर तीसरी बार बारह बज कर पैंतालिस मिनट तक स्थगित हुई।
सदन से मार्शल के जरिए बाहर कराए जाने को लेकर भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार और विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा।
इस सत्र के दौरान भाजपा विधायकों की ओर से केजरीवाल सरकार की कथित “किसान विरोधी” नीतियों के विरोध की वजह से कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा है।
सुबह में सत्र के शुरुआत से पहले विधानसभा परिसर में प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों ने हल की छोटी छोटी प्रतिकृतियां लेकर विरोध जताया।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा, ''सरकार भूमि अधिग्रहण पर किसानों को पर्याप्त मुआवजा या कृषि उपकरणों पर कोई सब्सिडी नहीं देती है। आप सरकार के आठ साल के कार्यकाल के दौरान दिल्ली के गांवों में कोई अस्पताल, कॉलेज नहीं बना और सीवर लाइन नहीं बिछाई गई है।''
उन्होंने कहा कि अगर सरकार सदन में किसानों के मुद्दे पर चर्चा से बचेगी तो भाजपा विधायक विधानसभा में मुख्यमंत्री के कक्ष के बाहर धरना देंगे।
इस बीच, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने उपराज्यपाल वी के सक्सेना और मुख्य सचिव सहित दिल्ली सरकार के शीर्ष अधिकारियों पर सरकार के काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरना दिया।
आप विधायकों के विरोध के कारण विधानसभा की कार्यवाही 30 मिनट देरी से, सुबह 11.30 बजे शुरू हुई।
बैठक शुरू होने पर, ‘आप’ विधायक सरकार के काम में ''कथित'' हस्तक्षेप को लेकर उपराज्यपाल के खिलाफ विरोध जताते हुए आसन के समक्ष आ गए, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही को दोपहर 12 बज कर 15 मिनट तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
सदन की कार्यवाही जैसे ही दोबारा शुरु हुई, भाजपा विधायक कथित किसान विरोधी नीतियों को लेकर केजरीवाल सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए, पोस्टर लेकर आसन के समक्ष आ गए।
उन्होंने, अपनी सीटों पर वापस जाने तथा कार्यवाही चलने देने के अध्यक्ष के आग्रह पर ध्यान नहीं दिया जिसके बाद बैठक पहले दोपहर बारह बज कर तीस मिनट तक और फिर बारह बज कर पैंतालिस मिनट तक स्थगित कर दी गई।
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