नयी दिल्ली, पांच फरवरी उत्तरी दिल्ली में सिविल लाइंस के खैबर पास इलाके में विस्थापित लोग अपने घरों को तोड़े जाने के महीनों बाद बुधवार को इस उम्मीद के साथ मतदान केंद्रों पर कतार में खड़े दिखाई दिये कि आने वाली सरकार उन्हें स्थायी आवास मुहैया कराएगी।
अधिकारियों ने पिछले वर्ष 13 जुलाई और चार अगस्त को खैबर पास इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया था।
इलाके में 15 एकड़ जमीन खाली करने के लिए 250 से अधिक घरों को तोड़ा गया था।
यहां रहने वाले लोगों ने दावा किया कि उन्हें सही तरीके से नोटिस नहीं दिया गया जबकि अधिकारियों ने बताया कि निर्माण अवैध थे।
अतिक्रमण हटाओ अभियान में विस्थापित होने वालों में शामिल 30 वर्षीय रेखा ने कहा, “हमारे पास पहले अपना घर था लेकिन अब हम किराएदार के रूप में रहते हैं क्योंकि जिस जगह पर हम दशकों से रह रहे थे, वह अचानक एक दिन तोड़ दी गई।”
उन्होंने कहा, “मेरा परिवार मध्यम वर्गीय है और हर चीज महंगी होती जा रही है इसलिए अब हमारे ऊपर किराए का अतिरिक्त बोझ है। आने वाली सरकार से हमारी एकमात्र उम्मीद यही है कि वह हमें अपना घर वापस दिलाने में मदद करेगी।”
पूजा (50) भी इस उम्मीद में मतदान करने आईं कि नई सरकार उन्हें न्याय दिलाने में मदद करेगी।
उन्होंने कहा, “मैं एक रिश्तेदार के घर पर रह रही हूं। मैं यहां वोट देने आई हूं ताकि नई सरकार हमारे लिए काम करे और हमें आश्रय दे।”
अनिल कुमार (45) ने कहा कि उन्होंने अपना घर और दुकान दोनों ही अभियान में खो दिया।
उन्होंने कहा कि दुकान ही उनकी आय का स्रोत थी।
कुमार ने कहा, “मेरे दो बच्चे, जो यहां पढ़ रहे थे लेकिन हमें शैक्षणिक वर्ष के बीच में ही यहां से चले जाना पड़ा। इसके कारण उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई।”
उन्होंने कहा, “अब मैं नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा हूं। हम 60 साल से अधिक समय से यहां रह रहे हैं, सरकार को कम से कम हमें कुछ मुआवजा तो देना चाहिए।”
दिल्ली की 70 विधानसभा सीट पर मतदान जारी है और मतगणना आठ फरवरी को होगी।
जितेंद्र रंजन
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