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लॉकडाउन बढ़ने से न्यायालय और अन्य अदालतों में अहम मामलों की सुनवाई में विलंब

होली के अवकाश के बाद न्यायालय में सबरीमला मामले की सुनवाई होनी थी जो धर्म की स्वतंत्रता की गुंजाइश से संबंधित है।

लॉकडाउन बढ़ने से न्यायालय और अन्य अदालतों में अहम मामलों की सुनवाई में विलंब
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नयी दिल्ली, 14 अप्रैल करोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिये राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की अवधि 3 मई तक बढ़ाए जाने से उच्चतम न्यायालय में संशोधित नागरिकता कानून, अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द किये जाने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई में देरी होगी। बंद की वजह से न्यायालय ने पहले ही अपना कामकाज सीमित कर लिया है और फिलहाल वह अत्यावश्यक प्रकृति वाले मामलों की सुनवाई ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कर रहा है।

होली के अवकाश के बाद न्यायालय में सबरीमला मामले की सुनवाई होनी थी जो धर्म की स्वतंत्रता की गुंजाइश से संबंधित है।

कोरोना वायरस महामारी की चलते केंद्र द्वारा आपात कदम के तौर पर बंद की घोषणा किये जाने से पहले न्यायालय की सुनवाई का कार्यक्रम बेहद व्यस्त था क्योंकि उसने सीएए विरोधी याचिकाकर्ताओं के साथ ही अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द किये जाने के खिलाफ याचिका दायर करने वालों को आश्वस्त किया था कि नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सबरीमला मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिकाएं सुनी जाएंगी।

बहरहाल, सामाजिक दूरी जैसे कदमों की वजह से सर्वोच्च न्यायालय में कुछ ही अदालतें काम कर रही थीं लेकिन बंद की वजह से अदालतों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बेहद महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई तक ही सीमित होना पड़ा।

दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालतों द्वारा बंद की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिये ग्रीष्म अवकाश को इस साल स्थगित किये जाने की घोषणा के कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (एससीबीए) ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एस ए बोबड़े और उनके साथी न्यायाधीशों से शीर्ष अदालत में ग्रीष्म अवकाश को रद्द करने की घोषणा करने का अनुरोध किया।

एससीबीए ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ग्रीष्म अवकाश को काम के वक्त के तौर पर देखे।

सिर्फ एससीबीए ही नहीं, राकेश द्विवेदी और दिनेश गोस्वामी जैसे कुछ प्रमुख वकीलों ने भी सीजीआई को पत्र लिखकर बंद के कारण अदालतों के काम नहीं करने से न्यायिक कार्य के बाधित होने पर चिंता जाहिर की थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय में भी उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में शामिल लोगों पर कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के साथ ही सीएए के खिलाफ जामिया नगर में प्रदर्शन और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई लंबित है।

मार्च में सुनवाई के लिये सूचीबद्ध मामले अप्रैल में विभिन्न तारीखों पर सुनवाई के लिये टाल दिये गए थे।

इन मामलों पर सुनवाई 21 अप्रैल को होनी थी वहीं अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जमानत याचिका पर 20 अप्रैल को सुनवाई होनी थी।

उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को अपने सभी अंतरिम आदेशों को 15 मई तक के लिये बढ़ा दिया था। ऐसा ही आदेश जिला अदालतों के लिये भी था।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय ने नौ अप्रैल को अपने एक से 30 जून तक होने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश को स्थगित करने का फैसला किया था।

उसने निचली अदालतों के ग्रीष्म अवकाश को भी रद्द कर दिया था।

अदालत ने जमानत मिलने के बावजूद जमानती बॉन्ड भरने में असमर्थ होने की वजह से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को नौ अप्रैल को निजी मुचलके पर छोड़ने का आदेश दिया था।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी बंद की वजह से मामलों की सुनवाई नहीं कर रहा है।

दिल्ली की निचली अदालतों में भी बंद की वजह से उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों समेत कई दूसरे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 14, 2020 07:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).