देहरादून, 26 अप्रैल उत्तराखंड के देहरादून स्थित राजकीय दून चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल परिसर में दशकों पहले बनी ‘अवैध’ मजार ध्वस्त कर दी गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि यह एक ‘वैध’ संरचना थी।
कोतवाली पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि नगर प्रशासन ने शुक्रवार रात इलाके को सील कर दिया और पुलिस की मौजूदगी में दो जेसीबी मशीनों की मदद से संरचना को ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि ऋषिकेश के रहने वाले एक व्यक्ति ने ‘उत्तराखंड सीएम हेल्पलाइन’ पोर्टल पर अस्पताल परिसर में मजार होने की शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने बताया कि उक्त संरचना से संबंधित रिकॉर्ड दस्तावेज की जांच की गई, जिसमें साबित हुआ कि वह अवैध है और फिर यह कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने बताया कि यह शिकायत भी मिली थी कि संरचना की वजह से आने-जाने वाले लोगों को असुविधा हो रही है क्योंकि परिसर में पहले ही स्थान की कमी है।
सूत्रों ने बताया कि मजार का ‘खादिम’ (देखभाल करने वाला)अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को स्वस्थ होने के लिए मजार पर अकीदत पेश करने को कहता था।
अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने भी उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर इसे हटाने की मांग की थी।
राज्य में पिछले करीब दो वर्षों से अवैध मजारों को ध्वस्त किए जाने का अभियान जारी है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के सूत्रों ने हालांकि दावा किया कि मजार वैध है। उन्होंने इस कार्रवाई को एकतरफा करार देते हुए कहा कि बोर्ड को विश्वास में नहीं लिया गया।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि यह बाबा कमाल शाह की लगभग 100 साल पुरानी मजार है, जो एक सूफी संत थे।
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