देश की खबरें | त्रिपुरा में विधायकों के भत्तों पर नियम बदलने का फैसला

अगरतला, तीन नवंबर त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा के एक विधायक के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के दो दिन बाद बिप्लब कुमार देब सरकार ने उस नियम को बदलने का फैसला किया है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते सहित कुछ सुविधाओं का आजीवन आनंद लेने की अनुमति मिलती है, भले ही वे सिर्फ एक दिन के लिए ही क्यों न रहे हों।

सूचना और संस्कृति मंत्री सुशांत चौधरी ने बुधवार को बताया कि प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, विधायकों को इस तरह के लाभों के हकदार होने के लिए एक पूर्ण कार्यकाल पूरा करने की आवश्यकता होगी।

उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा मंगलवार को इस बाबत "सकारात्मक" निर्णय किया गया था।

धलाई जिले के सूरमा (एससी) निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा विधायक आशीष दास रविवार को अगरतला में तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी की एक रैली में तृणमूल में शामिल हुए। उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया।

पिछली वाम मोर्चा सरकार ने एक नियम बनाया था कि जिस विधायक ने कम से कम चार साल की सेवा की होगी उसी को सभी सुविधाएं और वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।

2018 में सत्ता में आने के बाद, भाजपा-आईपीएफटी सरकार ने विधायकों के भत्तों में बढ़ोतरी की और यह भी कहा कि प्रत्येक विधायक अपनी पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों का आनंद ले सकता है, भले ही वह एक दिन के लिए विधायक क्यों न बना हो।

त्रिपुरा विधानसभा में सत्ता पक्ष की मुख्य सचेतक कल्याणी रॉय ने 27 अक्टूबर को अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती को पत्र लिखकर दास को "पार्टी विरोधी गतिविधियों" के लिए विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।

चक्रवर्ती ने अगले दिन दास को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा था कि उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

अध्यक्ष ने कहा, "यदि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं आता है, तो उन्हें शारीरिक रूप से पेश होने के लिए कहा जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।"

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