देश की खबरें | फिरौती के लिए बच्चे के अपहरण और हत्या के दोषी को सुनाई गई फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील

नयी दिल्ली, 26 जून उच्च न्यायालय ने फिरौती के लिए 12 साल के बच्चे का अपहरण करने और फिर उसकी हत्या करने के दोषी व्यक्ति को सुनाई गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है जिसके तहत उसे बिना किसी छूट के 20 साल तक जेल में रहना होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह नहीं साबित किया जा सकता कि हत्या पूर्व नियोजित थी या समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरने के लिहाज से यह काफी पैशाचिक कृत्य था।

उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यह मामला दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं आता और कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां दोषी में सुधार होने की संभावना नहीं होती।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने 64 पेज के फैसले में दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता जीवक नागपाल की मौत की सजा की पुष्टि की मांग को खारिज कर दिया।

अदालत ने हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, आपराधिक धमकी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ के अपराधों के लिए उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन फांसी की सजा को संशोधित करके आजीवन कारावास में बदल दिया और उसकी अर्जी का निपटारा कर दिया।

दिल्ली का यह मामला 18 मार्च, 2009 का है जब बच्चा एक स्टेशनरी की दुकान से गायब हो गया था। इसके बाद बच्चे के पिता को मोबाइल फोन पर बच्चे के अपहरण और फिरौती की मांग से संबंधित संदेश मिला था।

हालांकि, पुलिस ने शिकायत मिलने पर आरोपी को अगले ही दिन पकड़ लिया। आरोपी नागपाल पुलिस को रोहिणी स्थित एक सूखे नाले के पास ले गया जहां उसने बच्चे का शव छिपाया था।

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