नयी दिल्ली, आठ जनवरी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोना चोरी की घटना में अंगूठे का निशान मिलने के मद्देनजर सीमा शुल्क विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोप है कि अधिकारी विभाग के खजाने से सोना चोरी कर सोने की जगह गैर-कीमती धातु को रख देता था। अधिकारी को इस तरह के चार मामलों में सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया लेकिन पांचवें मामले में आरोप लगाने के लिए सीबीआई ने मौके से मिले अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया।
अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने सीमा शुल्क विभाग के संजीव कुमार पर विभाग द्वारा जब्ती के बाद ‘स्ट्रांग रूम’ में रखे सोने को गैर-कीमती पीली धातु से बदलने के संबंध में चोरी करने का मामला दर्ज किया है।
सीमा शुल्क विभाग की तिजोरी से सोने के 36 से अधिक पैकेट की चोरी की जांच के लिए एजेंसी को गृह मंत्रालय से अनुमति मिली थी। इनमें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विभाग के गोदाम में रखा लगभग 38 किलोग्राम सोना था। वर्ष 2016 में निरीक्षण कवायद के दौरान चोरी का पता चला था।
सीबीआई ने कुमार को इस मामले में 2017 में सोनीपत से गिरफ्तार किया था। सीमा शुल्क विभाग में अधीक्षक कुमार की आईजीआई हवाई अड्डे पर दो कार्यकाल 19 सितंबर, 2002 से 13 जनवरी, 2003 तथा 13 अक्टूबर 2003 से 19 अप्रैल 2004 तक तैनाती रही।
जांच के दौरान, केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के वैज्ञानिकों ने कुमार के खिलाफ वर्तमान मामले में संबंधित पैकेट सहित 21 पैकेट में से पांच पर उनकी उंगलियों के निशान पाए।
अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क के गोदाम के विभिन्न संरक्षकों की उंगलियों के निशान एकत्र किए, जहां इन जब्त पैकेट को न्यायिक कार्यवाही के दौरान सुरक्षित रखा गया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सीएफएसएल रिपोर्ट ने कुमार के ‘फिंगरप्रिंट’ के नमूने का मिलान दाहिने हाथ के अंगूठे के निशान से किया। उन्होंने कहा कि ये निशान ‘‘पीले रंग की गैर-कीमती धातु की पट्टी पर’’ मिले जिसे कथित रूप से पैकेट के सोने को बदलने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
आरोपपत्र दाखिल करने के बाद, जब कुमार के खिलाफ आरोप तय करने के लिए मामला एक विशेष अदालत के सामने आया, तो उनके वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ अपर्याप्त सबूत हैं।
कुमार ने यह भी दलील दी कि उसके पास से सोने की कोई बरामदगी नहीं हुई थी और सीबीआई के पास एकमात्र सबूत ‘‘मौके’’ पर मिला अंगूठे का निशान था जिसे कई संरक्षकों में से एक होने के नाते, वह अपने अन्य सहयोगियों की तरह पैकेट को संभाल रहे थे।
वकील ने दलील दी कि आरोपी विभिन्न कार्यकाल के लिए तैनात कई संरक्षकों में से एक था, ऐसे में संभावना थी कि गोदाम में रखे पार्सल पर उनकी उंगलियों के निशान रहे होंगे। वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पांच समान मामले थे और चार मामलों में आरोप हटा दिए गए हैं।
विशेष अदालत ने दलील को खारिज कर करते हुए कहा कि सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार पैकेट पर उंगलियों के निशान नहीं मिले, लेकिन पैकेट के अंदर गैर-कीमती ‘‘पीली धातु’’ के दो आयताकार बार पर मिले, जिसे कथित तौर पर सोने को बदलने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अंजनी महाजन ने कहा, ‘‘यह तथ्य आरोपी के खिलाफ कथित अपराध को लेकर एक गहरा संदेह पैदा करता है क्योंकि इस बात का कोई प्रथम दृष्टया तर्क नहीं है कि जब्त किए गए पैकेट के अंदर रखी वस्तु में संरक्षकों की उंगलियों के निशान होने चाहिए। वर्तमान मामले में आरोपी (कुमार) को इस परिस्थिति को मुकदमे के दौरान स्पष्ट करना होगा।’’
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी को अन्य मामलों में आरोपमुक्त किया जाना अप्रासंगिक है क्योंकि बचाव पक्ष ने विवरण प्रदान नहीं किया था, और प्रत्येक मामले पर उसके तथ्यों के हिसाब से विचार किया जाता है। अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में आरोप तय करने के लिए ‘‘पर्याप्त सामग्री’’ रिकॉर्ड में है।
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