जरुरी जानकारी | एक अप्रैल से 12 जुलाई के दौरान कच्चा पामतेल आयात 10 प्रतिशत बढ़ा: वित्त मंत्रालय

नयी दिल्ली, 14 जुलाई सरकार ने बुधवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में अबतक देश में कच्चे पाम तेल का आयात लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 20.91 लाख टन से अधिक हो गया है तथा सीमा शुल्क विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि बंदरगाहों पर कोई रुकावट न हो और आयात मंजूरी लगभग 3-4 दिनों में दी जाए।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हाल की अवधि में कच्चे पाम तेल के आयात में ‘उल्लेखनीय वृद्धि’ हुई है, जिसमें 30 जून से 12 जुलाई के बीच 39 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। सरकार ने खुदरा बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए 30 जून को पाम तेल के सीमा शुल्क में कटौती की थी।

व्यापार को सुविधाजनक बनाने और मंजूरी में तेजी लाने के लिए, सभी सीमा शुल्क क्षेत्रों में नोडल अधिकारियों को नामित किया गया है और सुचारू निकासी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया भी लागू की गई है।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह देखा गया है कि खाद्य तेल के लिए आयात मंजूरी का समय मौजूदा दौर में घटकर लगभग 3-4 दिन रह गया है।...यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बंदरगाहों पर कोई रुकावट न हो।’’

सीमा शुल्क विभाग भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ तालमेल कर खाद्य तेलों के आयात की मंजूरी की लगातार निगरानी कर रहा है। इसके अलावा, यह नियमित रूप से उद्योग संघों के साथ भी संपर्क में है।

मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 12 जुलाई, 2021 के बीच कच्चे पाम तेल का आयात 9.89 प्रतिशत बढ़कर 20.91 लाख टन से अधिक हो गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आयात 19.03 लाख टन था।

इसमें कहा गया है कि 30 जून से 12 जुलाई के बीच आयात 39.09 प्रतिशत बढ़कर 4.04 लाख टन से अधिक हो गया। वर्ष 2020 की तुलनीय अवधि में, 2.90 लाख टन से अधिक कच्चे पाम तेल का आयात किया गया था।

सरकार ने पिछले महीने खाद्य कच्चे पाम तेल पर सीमा शुल्क 35.75 प्रतिशत से घटाकर 30.25 प्रतिशत और रिफाइंड पाम तेल पर 49.5 प्रतिशत से घटाकर 41.25 प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा, रिफाइंड पाम तेल के आयात प्रतिबंध को भी 31 दिसंबर तक हटा दिया गया है।

इन उपायों का उद्देश्य खुदरा बाजार में खाद्य तेल की कीमतों को कम करना है।

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