देश की खबरें | न्यायालय एमसीडी में सदस्यों को नामित करने के खिलाफ याचिका पर सोमवार को करेगा सुनवाई

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल उच्चतम न्यायालय दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में उपराज्यपाल द्वारा 10 सदस्यों को नामित करने के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ याचिका पर सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने 29 मार्च को याचिका पर उपराज्यपाल कार्यालय से जवाब मांगा था।

वकील शादान फरासत के माध्यम से दायर याचिका में अरविंद केजरीवाल-नीत सरकार ने निर्वाचित सरकार और उसकी मंत्रिपरिषद की ‘सहायता और सलाह’ के बिना सदस्यों को नामित करने के उपराज्यपाल के फैसले को चुनौती दी है।

शीर्ष अदालत ने फरवरी में यह स्पष्ट करके महापौर और उप महापौर के लिए चुनाव कराना सुनिश्चित किया था कि एमसीडी के 10 मनोनीत सदस्य महापौर के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं।

मनोनीत सदस्यों का नामांकन रद्द करने के अनुरोध के अलावा, याचिका में उपराज्यपाल कार्यालय को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुरूप दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 3(3)(बी)(आई) के तहत एमसीडी में सदस्यों को नामित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम का कोई भी प्रावधान कहीं भी यह नहीं कहता है कि इस तरह का नामांकन प्रशासक द्वारा अपने विवेक से किया जाना है।

याचिका में कहा गया, ‘‘यह पहली बार है, जब निर्वाचित सरकार को उपराज्यपाल द्वारा पूरी तरह से दरकिनार करते हुए इस तरह का नामांकन किया गया है, जिससे एक गैर-निर्वाचित कार्यालय को एक ऐसी शक्ति का अधिकार मिल गया, जो विधिवत निर्वाचित सरकार से संबंधित है।’’

दिल्ली से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि ‘प्रशासक’ शब्द को प्रशासक के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, जो यहां उपराज्यपाल है तथा जो मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करता है।

याचिका में दावा किया गया है कि चुनी हुई सरकार की ओर से किसी भी प्रस्ताव को लाने की अनुमति नहीं दी गई और सदस्यों के नामांकन से संबंधित फाइल केवल पांच जनवरी को संबंधित विभाग के मंत्री को भेजी गई, जब नामांकन पहले ही हो चुका था और अधिसूचित किया जा चुका था।

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