नयी दिल्ली, 18 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में 2002 से 2006 के बीच कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों से जुड़ी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई की।
इन मामलों की निगरानी के लिए अदालत ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एच. एस. बेदी की अगुवाई में एक समिति गठित की थी।
न्यायमूर्ति बेदी को 2002 से 2006 तक के 17 कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों की जांच करने वाली निगरानी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और उन्होंने उच्चतम न्यायालय को सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट सौंपी थी।
समिति ने 2019 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। समिति ने 17 मामलों में से तीन में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी।
यह मामला बुधवार को न्यायमूर्ति एस. के. कौल, न्यायमूर्ति ए. एस. ओका और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया।
पीठ मार्च में फिर से मामले की सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने कहा कि सभी पक्षकारों को सुनने के बाद यह सामने आया कि ‘‘आखिरकार यह मुद्दा अब तीन मुठभेड़ों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।’’
अदालत कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिए 2007 में वरिष्ठ पत्रकार बी. जी. वर्गीज और गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। वर्गीज का 2014 में निधन हो गया था।
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