देश की खबरें | न्यायालय ने कुछ मोबाइल फोन को ‘इंटरसेप्ट’ करने की अनुमति देने वाले निर्देशों को रद्द करने संबंधी फैसले पर रोक लगाई

नयी दिल्ली, 15 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार के संदेह में कुछ लोगों के मोबाइल फोन कॉल को ‘इंटरसेप्ट’ करने की अनुमति देने वाले राज्य सरकार के तीन अलग-अलग निर्देशों को रद्द करने संबंधी राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह की पीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर राज्य की याचिका पर उनका जवाब मांगा। पीठ ने उस याचिकाकर्ता को भी नोटिस जारी किया जिनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने इस साल चार जुलाई को आदेश पारित किया था।

पीठ राजस्थान सरकार और अन्य द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी पेश हुए।

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 की धारा 5(2) के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राजस्थान सरकार के सचिव (गृह) द्वारा पारित 28 अक्टूबर, 2020, 28 दिसंबर, 2020 और 17 मार्च, 2021 के आदेशों को रद्द कर दिया था।

अधिनियम की धारा 5 लाइसेंस प्राप्त टेलीग्राफ को अपने अधिकार में लेने और संदेशों को बाधित (इंटरसेप्ट) करने का आदेश देने की सरकार के अधिकार से जुड़ा है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है, ‘‘क्या भ्रष्टाचार में लिप्त एक लोक सेवक द्वारा इस्तेमाल किये गये टेलीफोन को भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2) के तहत ‘इंटरसेप्ट’ किया जा सकता है?’’

इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने तीन आदेशों को रद्द कर दिया था, जबकि उनमें से दो उस याचिकाकर्ता से संबंधित नहीं थे जिन्होंने वहां याचिका दायर की थी।

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