देश की खबरें | बॉलीवुड निर्माताओं की याचिका पर अदालत ने ‘रिपब्लिक टीवी’, ‘टाइम्स नाउ’ से मांगा जवाब
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ को कथित ‘‘गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणियां’’ करने या प्रकाशित करने से रोकने के अनुरोध वाली बॉलीवुड के प्रमुख निर्माताओं की याचिका पर संबंधित मीडिया घरानों से सोमवार को जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने ‘एआरजी आउटलायर मीडिया’ और ‘बेनेट कोलमैन’ समूह से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि उनके चैनलों या सोशल मीडिया मंचों पर कोई मानहानिकारक सामग्री ‘अपलोड’ न की जाए।

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याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ी टिप्पणी की और पीछा कर रहे मीडिया से बचने की कोशिश के दौरान ब्रिटेन की राजकुमारी डायना की मौत का जिक्र किया तथा कहा कि ‘‘स्वर कुछ धीमा किए जाने’’ की आवश्यकता है क्योंकि लोग ‘‘लोकतंत्र के चौथे स्तंभ’’ से इसकी शक्तियों की वजह से भयभीत हैं।

अदालत ने याचिका पर ‘रिपब्लिक टीवी’, इसके प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और रिपोर्टर प्रदीप भंडारी, ‘टाइम्स नाउ’, इसके प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर और समूह संपादक नविका कुमार और गूगल, फेसबुक तथा ट्विटर से जवाब मांगा।

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प्रमुख फिल्म निर्माताओं ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद विभिन्न मुद्दों पर बॉलीवुड के सदस्यों के खिलाफ ‘‘गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणियां’’ करने या प्रकाशित करने तथा कथित मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने का आग्रह किया है।

याचिका बॉलीवुड के चार संगठनों और 34 प्रमुख निर्माताओं ने दायर की है।

मीडिया घरानों के वकील ने अदालत को यह आश्वासन दिया कि वे कार्यक्रम संहिता और केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) अधिनियम का पालन करेंगे।

अदालत ने बेनेट कोलमैन समूह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी से पूछा कि यदि चैनल स्व-नियमन का पालन नहीं करता तो आगे क्या कदम उठाया जाएगा।

इसने कहा, ‘‘स्वर कुछ धीमा किए जाने की आवश्यकता है। अदालत के अधिकारी के रूप में मुझे बताएं कि यदि आप स्व-नियमन का पालन नहीं करते तो अगला कदम क्या है। हम इस बारे में क्या करें। अदालत को आपका हलफनामा सही प्रतीत नहीं होता है। आप सभी को कुछ न कुछ करना है। यह निराशाजनक है और हर किसी को निरुत्साहित करता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘उचित रिपोर्टिंग होनी चाहिए। कल आपका (कानूनी) समुदाय हो सकता है। आपको अपने वृतांत से ऊपर उठना होगा और मुझे बताएं कि क्या किया जाना चाहिए।’’

इसने कहा कि लोग लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से इसकी शक्ति की वजह से भयभीत हैं और अदालतें इसमें हस्तक्षेप करने वाला अंतिम विकल्प हैं।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘राजकुमारी डायना की मौत इसलिए हुई क्योंकि वह मीडिया से बचकर भाग रही थीं। आप इस तरह नहीं कर सकते।’’

उच्च न्यायालय ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख तय की है।

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