देश की खबरें | अदालत ने एमसीडी से बहुस्तरीय कार पार्किंग के निर्माण के लिए भू-उपयोग में बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा

नयी दिल्ली, 17 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम से यह बताने को कहा कि कैसे किसी जमीन के “भूमि उपयोग” को उसकी स्थायी समिति ने आंशिक आवासीय और सार्वजनिक से बदलकर “मल्टीलेवल कार पार्किंग” कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने नगर निकाय को एक हलफनामा दाखिल करने और उस सक्षम प्राधिकारी का विवरण बताने को कहा जिसने दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत भूमि उपयोग में बदलाव की अनुमति दी थी।

अदालत का यह निर्देश वकील अमित साहनी द्वारा एक वाणिज्यिक स्थान और बहु-स्तरीय कार पार्किंग सुविधा के निर्माण के लिए जगह बनाने के वास्ते करोल बाग में एक प्राथमिक विद्यालय के कथित विध्वंस के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर आया।

अपने हालिया आदेश में, अदालत ने दर्ज किया कि एमसीडी द्वारा दायर हलफनामे से पता चला है कि निर्माण स्थल पर एमसीडी की स्थायी समिति द्वारा भूमि का उपयोग “आंशिक आवासीय और आंशिक सार्वजनिक अर्ध सार्वजनिक (पुलिस थाने)” से बदलकर “बहुस्तरीय कार पार्किंग” कर दिया गया है।

पीठ ने 14 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “एमसीडी को उस सक्षम प्राधिकारी (संबंधित वैधानिक प्रावधानों के साथ) के बारे में विवरण प्रस्तुत करने का समय दिया गया है जो दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत भूमि उपयोग में बदलाव की अनुमति देने में सक्षम है।”

पीठ में न्यायमूर्ति संजीव नरूला भी शामिल हैं।

अदालत ने आदेश दिया, “आज से चार सप्ताह की अवधि के भीतर उस सीमा तक एक संक्षिप्त हलफनामा दायर किया जाए जिसमें शक्ति के स्रोत और परिवर्तन की अनुमति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को समझाया जाए।”

इस मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

याचिका 2022 में दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि संबंधित भूमि को क्षेत्र के लेआउट प्लान में एक स्कूल के रूप में उपयोग के लिए नामित किया गया था, जो अब भी संशोधित नहीं है, इसलिए “वहां दुकानों और कार्यालयों के साथ व्यावसायिक भवन का निर्माण या बहु-स्तरीय पार्किंग का निर्माण करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है”।

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