देश की खबरें | न्यायालय ने रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने देशभर में जेलों और निरोध केंद्रों (डिटेंशन सेंटर) में ‘अवैध एवं मनमाने’ तरीके से रखे गये रोहिंग्या शरणार्थियों को रिहा करने का सरकार को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया तथा चार हफ्तों के अंदर उससे जवाब मांगा।

याचिकाकर्ता प्रियाली सुर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कई रोहिंग्या शरणार्थियों को देशभर में कई स्थानों पर हिरासत में रखा गया है, और उनकी रिहाई का आदेश देने का अनुरोध किया, ताकि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार और अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता के अधिकारों की रक्षा हो सके।

सुर की याचिका में कहा गया है कि रोहिंग्या म्यांमा के रखाइन प्रांत के जातीय अल्पसंख्यक हैं और उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने विश्व का सर्वाधिक उत्पीड़ित जातीय अल्पसंख्यक बताया है।

याचिका में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) द्वारा उन्हें शरणार्थी का दर्जा दिये जाने के बावजूद, गर्भवती महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत भर की जेलों और निरोध केंद्रों में गैरकानूनन और लंबे समय से हिरासत में रखा गया है।

याचिका में केंद्र को उन रोहिंग्या लोगों को रिहा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जिन्हें जेलों/निरोध केंद्रों या किशोर आश्रय गृहों में अवैध रूप से और मनमाने ढंग से रखा गया है तथा बिना कोई कारण बताए या विदेशी (नागरिक) अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया है।

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