नयी दिल्ली, 22 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें दिल्ली सरकार को बिना किसी देरी के कोविड-19 से संक्रमित लोगों और इससे मरने वाले लोगों की वास्तविक संख्या बताने और मृतकों का लेखा-जोखा रखने वाली समिति (डेथ ऑडिट कमिटी) को रद्द करने के दिशा निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायाधीश प्रतीक जालान की पीठ ने याचिका का निस्तारण कर दिया और याचिकाकर्ता को ‘‘उचित समय’’ पर फिर से अदालत का रुख करने की छूट दी।
अखिल भारतीय वकील संघ द्वारा दायर जनहित याचिका में दिल्ली सरकार को विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों द्वारा मुहैया कराए जा रहे आंकड़ों के आधार पर हर 24 घंटे के बुलेटिन के जरिए कोविड-19 के पुष्ट मामलों और इससे मरने वाले लोगों की संख्या से संबंधित आंकड़ें प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की।
वकील फिदेल सेबेस्टियन द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि आप सरकार ने दावा किया कि उसने 20 अप्रैल को ‘डेथ ऑडिट कमिटी’ गठित की और समिति द्वारा आंकड़ें जारी किए जा रहे हैं। ’’
इसमें कहा गया, ‘‘हालांकि विभिन्न अस्पतालों द्वारा मुहैया कराई जा रही असल सूचना और दिल्ली सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के बीच भारी विसंगति की वजह स्पष्ट नहीं की गई।
याचिका में कहा गया है कि वायरस के फैलने के वास्तविक आंकड़ों और मृतकों की संख्या नागरिकों से छिपाना दिल्ली सरकार का अनैतिक कदम है।
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