देश की खबरें | कोविड-19 महामारी के कुप्रबंधन की स्वतंत्र जांच के लिये याचिका न्यायालय ने खारिज की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी से निबटने में केन्द्र सरकार के कथित कुप्रबंधन की स्वतंत्र जांच के लिये पूर्व नौकरशाहों की जनहित याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। देश में इस समय कोविड-19 से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 63 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ से इन पूर्व नौकरशाहों के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चार फरवरी को गृह मंत्रालय ने एक परामर्श जारी किया था लेकिन चार मार्च तक अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच नहीं की गयी। यही नहीं, इस दौरान 24 फरवरी को ‘नमस्ते ट्रंप’ के आयोजन की इजाजत दी गयी। भीड़भाड़ से बचने की गृह मंत्रालय की सलाह के बावजूद भी एक स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में एक लाख लोग एकत्र हुये।

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भूषण के मुताबिक विशेषज्ञों ने कहा था कि संपूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण जीडीपी में अभूतपूर्व 23 फीसदी की गिरावट आई, करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गईं और अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई।

उन्होंने दावा किया कि सरकार कोविड-19 पर काबू पाने में असफल है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस संक्रमण से 63 लाख से भी ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडान लागू करने से पहले पर्याप्त संख्या में पीपीई किट प्राप्त करने के लिये कदम नहीं उठाये गये, जिसकी वजह से अनेक डॉक्टरों की जान चली गयी। अनेक पुलिसकर्मियों की भी इस दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत हो गयी।

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पीठ ने कहा कि यह सार्वजनिक बहस का मामला है और न्यायालय इसमें ‘‘दखल नहीं देना चाहता।’’ पीठ ने कहा कि ये मामले सरकार के लिये हैं ओर प्राधिकारियों को स्थिति से निबटने के लिये पर्याप्त स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

यह जनहित याचिका पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने दायर की थी और इसमें जांच आयोग कानून के तहत आयोग गठित करके कोविड-19 से निबटने में हुयी असफलताओं और खामियों का पता लगाने का अनुरोध किया गया था।

अनूप

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