बनिहाल (जम्मू कश्मीर), 11 जून जम्मू कश्मीर में बनिहाल की एक अदालत ने एक सैनिक की हत्या के 17 साल पुराने मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ (मामले को बंद करने की सिफारिश) खारिज कर दी और यह कहते हुए जांच पर असंतोष जताया कि इस बात का गंभीर संदेह पैदा होता है कि किसी को बचाने की कोशिश की जा रही थी।
बनिहाल के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) मनमोहन कुमार ने रामबन के पुलिस अधीक्षक को इस मामले की जांच की निगरानी करने और तीन महीने में उसे (जांच) पूरा करने का निर्देश भी दिया।
जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनिहाल में एक कैंप के अंदर संतरी चौकी में 19 मई, 2006 को 17 राष्ट्रीय राइफल्स के सिपाही युवराज उत्तम राव मृत पाये गये थे। उनके सीने में कई गोली लगी थीं। अदालत ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा, ‘‘पुलिस जांच में विसंगतियां हैं, क्योंकि एक जगह तो जांच अधिकारी ने कहा कि कुछ अज्ञात अधिकारियों ने सिपाही को मार डाला और साथ ही उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यह मौत आतंकवादियों की हरकत हो सकती है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, जांच अधिकारी ने इस बात का कोई सबूत इकट्ठा नहीं किया कि उस दुर्भाग्यपूर्ण रात को सेना के इस कैंप में कोई अतिक्रमण या हमला हुआ हो। इस हत्या में आतंकवादियों की भूमिका भी खारिज की जाती है क्योंकि संतरी चौकी की छत में छेदों का पता चला । इससे ऐसा लगता है कि गोलियां बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से दागी गयीं, क्योंकि टिनशेड बाहर की ओर खुला था।’’
अदालत ने कहा कि जांच 17 साल तक अधूरी रही है और जांच एजेंसी ने कहा कि कैंप के अंदर से किसी ने यह अपराध किया, लेकिन वह आरोपी का पता लगाने में असमर्थ रही।
अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले की जांच अपराधियों का पता लगाये बिना ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जिसमें कोई प्रगति नहीं हो रही है ... जांच अधिकारी का यह बहाना कि आरोपियों का पता लगाना संभव नहीं है, यह हास्यास्पद है, क्योंकि मृत सिपाही कैंप में अकेला नहीं था, तब वहां ड्यूटी पर कई सैन्यकर्मी थे ।’’
उसने कहा कि जांच अधिकारी की तहकीकात से सच्चाई का पता लगाने की उनकी अनिच्छा या हत्या जैसे अपराध की जांच के लिए जरूरी कानून के ज्ञान की कमी झलकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच पूरी हो जाने के बाद छह साल तक बनिहाल थाने में क्लोजर रिपोर्ट रखी गयी । अदालत ने कहा कि ‘क्लोजर रिपोर्ट’ 2016 में तैयार की गयी और उसे 2021 में अदालत में पेश किया गया।
अदालत ने कहा कि न्याय करने के लिए इस मामले में और जांच की जरूरत है।
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