जरुरी जानकारी | न्यायालय का यस बैंक के एटी-1 बांड मूल्य कम किये जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने बांडधारकों के यस बैंक के अतिरिक्त टियर-1 (एटी-1) बांड में किये गये 8,419 करोड़ रुपये के निवेश मूल्य को कम किये जाने के मार्च 2020 के निर्णय को चुनौती देने वाली 340 लोगों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। नकदी समस्या से जूझ रहे निजी क्षेत्र के बैंक को पटरी पर लाने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया है।

निवेशकों ने यह पैसा यस बैंक के ‘एडिशनल टियर-1 बांड’ में लगाया था। यह बांड असुरक्षित और अधीनस्थ की श्रेणी में आता है और इसकी कोई परिपक्वता तिथि नहीं होती। बैंकों को अपनी दीर्घकालीन पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिये इसे जारी करने की अनुमति होती है।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले को संबंधित उच न्यायालय के समक्ष उठाया जा सकता है।

न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा और न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘‘हम संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं। याचिकाकर्ता कानून में उपलब्ध उपयुक्त व्यवस्था को अपनाने के लिये स्वतंत्र है जिसमें संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत (उच्च न्यायालय के समक्ष) याचिका दायर करना शामिल हैं। ’’

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निजी बैंक को पटरी पर लाने के पैकेज के तहत एटी-1 बांडधारकों के निवेश मूल्य को मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए कम किया गया है। इससे यस बैंक के नये प्रबंधन को कामकाज को सामान्य ढंग से चलाने और बैंक को रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा लगायी गयी पाबंदी से बाहर निकलने में काफी मदद मिलेगी।

इस निर्णय से आहत बांडधारकों और अन्य ने बंबई और दिल्ली समेत विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं दायर की।

वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा न्यायालय में 343 बांडधारकों की तरफ से पेश हुए। उन्होंने आग्रह किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा 2016 और 2017 में एटी-1 बांड में किये गये निवेश मूल्य को कम किये जाने को अवैध घोषित किया जाए और निवेश राशि ब्याज के साथ निवेशकों को लौटाने का निर्देश दिया जाए।

बांडधारकों ने संस्थागत निवेशकों द्वारा खुदरा निवेशकों को बेचे गये एटी-1 बांड से जुड़े आंकड़े भी उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

अधिवक्ता ने कहा कि एटी-1 बांड के मूल्य को कम किया जाने से ऐसी स्थिति बनी है, जिससे खुदरा निवेशकों को अपने निवेश और जमा से वंचित होना पड़ा है।

इससे पहले, यस बैंक ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर एटी-1 बांड के मूल्य को कम किये जाने के 14 मार्च 2020 के निर्णय के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों और उपभोक्ता मंच में लंबित याचिकाओं को बंबई उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश देने का आग्रह किया था।

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