नयी दिल्ली, 14 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के उस सब्जी विक्रेता की जेल की सजा की अवधि घटा दी है, जिसे 10 रुपये मूल्य के 43 जाली नोट रखने के अपराध में दोषी करार दिया गया था।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने थेणी जिला निवासी पलानीसामी को रिहा करने का आदेश दिया।
पीठ ने 10 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘उसके खिलाफ केवल भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 489सी के तहत आरोप है। उसके पास 10 रुपये मूल्य के 43 जाली नोट पाये गये थे। वह एक सब्जी विक्रेता है। वह मामले में तीसरा आरोपी था।’’
आईपीसी की धारा 489 जाली नोट रखने से संबद्ध है। इस अपराध में अधिकतम सात साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
पलानीसामी को इस अपराध के लिए आठ जनवरी 2014 को दोषी करार दिया था और सात साल कैद की सजा सुनाई थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने 24 अक्टूबर 2019 को सजा की अवधि सात साल से घटा कर पांच साल कर दी। वह 451 दिनों से जेल में था।
पीठ ने उल्लेख किया कि अपील केवल पलानीसामी ने दायर की थी जो मामले में तीसरा आरोपी था।
न्यायालय ने कहा, ‘‘उपरोक्त पहलुओं पर विचार करते हुए, हम दोषसिद्धि कायम रखते हुए पहले काट ली गई सजा में संशोधन करने को इच्छुक हैं। उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई पांच साल की जेल की सजा की पूरी कर ली गई अवधि को संशोधित करते हुए आंशिक अपील की अनुमति दी जाती है।’’
पीठ ने कहा कि यदि किसी अन्य मामले में याचिकाकर्ता को जेल में रखने की जरूरत नहीं है तो उसे अब रिहा कर दिया जाए।
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