नयी दिल्ली, 19 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्तर की उस 28 वर्षीय महिला निशानेबाज के खिलाफ सीमा शुल्क कानून के तहत दर्ज आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया है, जिसके पिता को आग्नेयास्त्रों के कथित आयात में उसके लाइसेंस का उपयोग करते हुए पाया गया था। अदालत ने कहा कि महिला निशानेबाज को उसके पिता की कथित गलती के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया सीमा शुल्क अधिनियम के प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ता दिशा लैंगन के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उस अपराध के आवश्यक तत्वों का खुलासा नहीं करते हैं जिसके लिए आरोप लगाया गया है और इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि उन्हें अपने पिता द्वारा किए गए कथित अपराधों की जानकारी थी।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा, "इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता 26 साल की लड़की है जिसका भविष्य उज्ज्वल है और जो कानून की पढ़ाई के साथ-साथ निशानेबाजी के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को ऊंची उड़ान दे रही है और देश का नाम रोशन कर रही है, इस अदालत की सुविचारित राय है कि उसे उसके पिता के कथित कृत्यों के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।''
उच्च न्यायालय ने कहा कि मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने महिला को समन जारी करने की कार्रवाई में गलती की।
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा दायर शिकायत के अनुसार, महिला के पिता सहित तीन लोगों को इस तरह की एक विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर 29 अप्रैल, 2017 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया था कि एक गिरोह स्लोवेनिया से भारत में हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी करने में शामिल है।
इसमें कहा गया कि गिरोह के सदस्य सीमा शुल्क विभाग को बताए बिना अपने सामान में छिपाकर प्रतिबंधित वस्तुएं लेकर हवाई अड्डे के टर्मिनल तीन पर पहुंचेंगे।
शिकायत में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पिता ने फर्जी चालान का उपयोग करके हथियार आयात करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा जारी 'शस्त्र और गोला बारूद लाइसेंस' और नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) द्वारा जारी 'प्रसिद्ध निशानेबाज प्रमाणपत्र' का उपयोग किया। यह भी आरोप है कि हथियारों का वास्तविक मूल्य और ब्योरा छिपाया गया।
यह आरोप लगाया गया था कि गिरोह के सदस्य तस्करी करके लाए गए विदेशी मूल के हथियारों को भारी मुनाफा कमाकर भारत में बेच रहे थे।
शिकायत में कहा गया है कि इन हथियारों का इस्तेमाल वन्यजीवों के शिकार के लिए किया गया।
महिला ने डीआरआई के समक्ष अपने बयान में कहा कि घटना के दिन वह दिल्ली में नहीं थी और उस समय गांधीनगर स्थित ‘गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ में पढ़ाई कर रही थी।
लैंगन ने कहा कि उन्होंने कभी भी हथियारों के आयात का आदेश नहीं दिया और यह उनके पिता थे जिन्होंने उनकी ओर से हथियार खरीदे थे। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान केवल निशानेबाजी प्रतियोगिताओं पर रहा है और आग्नेयास्त्रों की सारी व्यवस्था और इनकी खरीद उनके पिता द्वारा की गई।
लैंगन ने कहा कि उन्हें अपने नाम पर हथियारों की संख्या के बारे में भी जानकारी नहीं थी क्योंकि सभी कागजी कार्रवाई उनके पिता द्वारा संभाली जाती थी।
महिला के वकील ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि उनकी मुवक्किल को उसके पिता द्वारा किए गए कथित अपराधों के लिए दंडित नहीं किया जा सकता और उसके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।
हालांकि, डीआरआई के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अधिनियम के तहत अपराध करने के बारे में विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं क्योंकि उसने हथियारों के कथित आयात में अपने लाइसेंस का इस्तेमाल अपने पिता को करने की अनुमति दी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि घटना की तारीख वाले दिन याचिकाकर्ता, गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एलएलबी पाठ्यक्रम में नामांकित होने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर की एक निशानेबाज थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में महिला का बयान बहुत प्रशंसनीय है और अदालत की राय में, उसने खुद कभी भी हथियारों के आयात का आदेश नहीं दिया और उसके पिता, जो खुद एक प्रसिद्ध निशानेबाज हैं, उसके लिए हथियार खरीदने के लिए जिम्मेदार थे और वह उनके द्वारा किए गए कथित अपराधों से अनजान थी।
इसने कहा कि याचिकाकर्ता को उसके पिता द्वारा किए गए कथित अपराधों के लिए दंडित नहीं किया जा सकता क्योंकि आपराधिक कानून के तहत प्रतिवर्ती दायित्व की कोई अवधारणा नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक शिकायत में नामित शेष आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी।
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