नयी दिल्ली, पांच जून उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों की परेशानियों से संबंधित मामले में शुक्रवार को मानवाधिकार निकाय एनएचआरसी को हस्तक्षेप करने की अनुमति प्रदान कर दी।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एमआर शाह की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान ली गयी याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को प्रवासियों को भेजने के लिए 15 दिनों का समय देना चाहती है।
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न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा श्रमिकों का पंजीकरण किया जाना चाहिए ताकि मूल राज्यों में रोजगार के अवसर सहित उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील अरोड़ा के माध्यम से दायर हस्तक्षेप याचिका में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने प्रवासी श्रमिकों की मुश्किलों को कम करने और उनके मानवाधिकार को सुनिश्चित करने के लिए "अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय" पेश किए। न्यायालय उन पर विचार करेगा।
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अपने एक अल्पकालिक उपाय में आयोग ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही का अनुमान लगाने के लिए प्रवासी राज्यों से रवाना होने और गंतव्य राज्यों में पहुचने के समय आंकड़ों को एकत्र करना चाहिए। इससे उन्हें पृथक-वास में रखने और राहत उपायों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
आयोग ने अंतर-राज्य प्रवासी कामगारों (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1979 के कार्यान्वयन के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया ताकि प्रवासी श्रमिकों के लिए यात्रा भत्ता सुनिश्चित हो सके।
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