देश की खबरें | विभिन्न दलों के विधायकों को आवास आवंटन में
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

रांची, 21 अक्टूबर झारखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा विधायक नवीन जयसवाल की याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि विभिन्न दलों के विधायकों को आवास आवंटन में "भेदभाव " क्यों किया जा रहा है और वास्तव में विधायकों को आवास आवंटन के नियम और आधार क्या हैं?

मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन एवं न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने जयसवाल की एकल पीठ आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया।

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खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा कि विभिन्न दलों के विधायकों को आवास आवंटन में "भेदभाव क्यों है? "

अदालत ने सरकार से पूछा है कि कितने विधायकों को उच्च श्रेणी के एफ टाइप आवास आवंटित हुए हैं? इस तरह के आवास के आवंटन के पीछे का आधार क्या है? क्या जयसवाल से कनीय विधायक को एफ टाइप आवास आवंटित किया गया है?

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अदालत ने सरकार को 11 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। उसी दिन इस मामले में आगे की सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने पीठ को बताया कि एकल पीठ ने अपने आदेश में स्वयं कहा है कि राज्य में मंत्री व विधायकों के आवास आवंटन के लिए कोई नियमावली नहीं बनी है। इसके चलते आवास आवंटन समिति ने ‘भेदभावपूर्ण’ तरीके से आवास आवंटित किये हैं। इसके लिए समिति ने विधायकों की वरीयता का भी ध्यान नहीं रखा है।

भाजपा विधायक जयसवाल ने उन्हें पूर्व सरकार में आवंटित एफ टाइप आवास को खाली करने के एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी है।

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