नयी दिल्ली, सात जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मकान खरीदारों का धन कथित रूप से हड़पने के आरोप में पिछले तीन साल से तिहाड़ जेल में बंद यूनिटेक लि के प्रवर्तक संजय चन्द्रा को मंगलवार को मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत दे दी क्योंकि उसके माता-पिता दोनों ही कोविड-19 से संक्रमित हैं।
न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुये संजय चन्द्रा को उसकी रिहाई की तारीख से 30 दिन के लिये अंतरिम जमानत प्रदान की।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अधिवक्ता को सुनने के बाद हमारी राय है कि आवेदक (चन्द्रा) के माता-पिता दोनों ही कोविड-19 से संक्रमित हैं और दोनों की वृद्धावस्था को देखते हुये मानवीय आधार पर यह अंतरिम जमानत देने का मामला बनता है। यह आदेश इन्हीं तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर दिया जा रहा है।
शीर्ष अदालत ने 17 अप्रैल, 2017 से न्यायिक हिरासत में रह रहे संजय चन्द्रा की अंतरिम अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। चन्द्रा ने अपने माता-पिता के कोविड-19 से संक्रमित होने की वजह से अस्पताल में भर्ती होने के आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था।
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आवेदनकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि चन्द्रा के माता- पिता वृद्ध हैं और उनके 81 वर्षीय पिता को आईसीयू में भर्ती किया गया है। उन्होंने कहा कि आवेदनकर्ता की 78 वर्षीय मां भी अस्पताल में भर्ती हैं।
पीठ ने इस अर्जी का निरस्तारण करते हुये अपने आदेश में कहा, ‘‘तदनुसार , हम आवेदक संजय चन्द्रा को उसकी रिहाई की वास्तविक तारीख से 30 दिन के लिये अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हैं।’’ पीठ ने चन्द्रा को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने और प्रत्येक रविवार को नजदीकी थाने में हाजरी लगाने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि चन्द्रा निचली अदालत की संतुष्टि के अनुरूप एक लाख रूपए का मुचलका देंगे और 30 दिन की अवधि पूरी होते ही समर्पण करेंगे।
न्यायालय ने मकान खरीदारों के करोड़ों रुपये कथित रूप से हड़पने के मामले में पिछले साल जनवरी में संजय और उनके भाई अजय चन्द्रा को जमानत देने से इंकार कर दिया था।
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