देश की खबरें | अदालत ने जबरन वसूली के आरोपी को ज़मानत दी, कहा ज़मानत ‘नियम’ है

नयी दिल्ली, 27 फरवरी दिल्ली की एक अदालत ने जबरन वसूली के एक मामले में एक आरोपी को ज़मानत प्रदान करते हुए कहा कि मामले के “गुणदोष को सज़ा मानकर ज़मानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।”

विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने आरोपी अनुज श्रीवास्तव को राहत दी, जिस पर 85 वर्षीय बुजुर्ग को बलात्कार के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर उनसे जबरन वसूली करने का आरोप है।

न्यायाधीश ने 30,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक मुचलके पर जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया। न्यायाधीश ने उसे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने और गवाहों को प्रभावित या संपर्क नहीं करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, “ " दलीलों पर विचार करने और इस तथ्य पर ध्यान देने के बाद कि अभियुक्त/आवेदक पिछले तीन महीनों से न्यायिक हिरासत में है तथा अधिक जांच की जरूरत नहीं है। कानून में स्थापित सिद्धांत है कि (मामले में) गुणदोष को सज़ा मानकर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता है जबकि ज़मानत नियम है और इससे इनकार अपवाद है।”

अभियोजन पक्ष के मामले मुताबिक, आरोपी ने बुजुर्ग को धमका कर चार लाख रुपये अपने खाते में डलवा लिए।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें अगस्त 2022 में उनके व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो मिले, साथ ही पैसे देने की मांग की गई थी, ऐसा नहीं करने पर उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

अभियोजन ने ज़मानत का विरोध किया है।

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