नयी दिल्ली, 23 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और उपराज्यपाल को परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की उस याचिका पर जवाब देने का ‘‘आखिरी मौका’’ दिया जिसमें उस प्रावधान को चुनौती दी गई है कि मुख्यमंत्री समेत दिल्ली सरकार के मंत्रियों को विदेश यात्राओं के लिए केंद्र से मंजूरी लेनी होगी।
याचिका पिछले साल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 31 जुलाई से 7 अगस्त, 2022 तक वैश्विक शहरों के 8वें शिखर सम्मेलन के लिए सिंगापुर की यात्रा की अनुमति से इनकार किए जाने की पृष्ठभूमि में दायर की गई थी।
सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने पूछा कि अधिकारियों द्वारा जवाब दाखिल क्यों नहीं किया गया। केंद्र और उपराज्यपाल के वकील ने कहा कि अंतिम अवसर के रूप में उन्हें अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ और समय दिया जाए।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप जवाब क्यों नहीं दाखिल कर रहे हैं। यह इस तरह नहीं चल सकता...चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का अंतिम अवसर दिया जाता है। मामले को 22 मई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।’’
उच्च न्यायालय ने 29 अगस्त, 2022 को नोटिस जारी किया था और दिल्ली के उपराज्यपाल तथा केंद्र सरकार को विदेश मंत्रालय, वित्त और गृह मंत्रालय के माध्यम से याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा था।
याचिका में कहा गया कि इस तरह के ‘‘विवेक के दुरुपयोग’’ का यह पहला उदाहरण नहीं है और उल्लेख किया गया कि मुख्यमंत्री को 2019 में कोपेनहेगन में सी -40 वर्ल्ड मेयर्स समिट में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। याचिका के मुताबिक, गहलोत ने लंदन जाने के लिए मंजूरी का अनुरोध किया था लेकिन केंद्र के अधिकारियों ने समय पर जवाब ही नहीं दिया।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता गहलोत ने कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी किए गए कई कार्यालय ज्ञापनों के कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने और मार्गदर्शन करने की मांग की है, जिसमें केंद्र को विदेश यात्रा के लिए राज्य सरकार के मंत्रियों को अनुमति देने या अस्वीकार करने का अधिकार दिया गया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY