नयी दिल्ली, 15 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में विभिन्न समूहों के बीच कथित रूप से शत्रुता को बढ़ावा देने के मामले में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) के चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से दिए गए संरक्षण को शुक्रवार को दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने ईजीआई और उसके चार सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता से पूछा कि उनके खिलाफ जातीय समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने का मामला कैसे बनता है।
मणिपुर सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत कुछ और समय तक ईजीआई और उसके सदस्यों को संरक्षण प्रदान कर सकती है और यदि पीठ चाहे तो याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय हस्तांतरित किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने ईजीआई और उसके सदस्यों को दंडात्मक कार्रवाई से दिए गए संरक्षण को 11 सितंबर को शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दिया था।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने चार सितंबर को कहा था कि ईजीआई की अध्यक्ष और उसके तीन सदस्यों के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है।
इनमें ईजीआई की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा और वरिष्ठ पत्रकार तथा ईजीआई सदस्य सीमा गुहा, भारत भूषण एवं संजय कपूर हैं।
मुख्यमंत्री सिंह ने ईजीआई सदस्यों पर राज्य में संघर्ष भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। चारों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी में मानहानि के अतिरिक्त आरोप हैं।
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