देश की खबरें | अदालत ने शादी का वादा कर नाबालिग लड़कियों के अपहरण, यौन उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता जताई

नयी दिल्ली, एक दिसंबर शादी के बहाने नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि ऐसी घटनाएं महिलाओं के सशक्तीकरण की अवधारणा को कमजोर करती हैं।

अदालत ने इसके साथ ही पीड़िता के अपहरण और दुष्कर्म के लिए अपनी दोषसिद्धि और 10 साल की सजा के खिलाफ एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के अतिसंवेदनशील मन पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि उनमें 12 या 14 साल की उम्र में उचित निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। अदालत ने कहा कि इन लड़कियों को यह विश्वास दिलाकर गुमराह किया जाता है कि वे वैवाहिक बंधन में बंध रही हैं।

अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न को अक्सर हमलावर द्वारा वैवाहिक शारीरिक संबंध के रूप में पेश किया जाता है ताकि पीड़िता को बिना किसी प्रतिरोध के इसे स्वीकार करने के लिए राजी किया जा सके।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने तीन नवंबर के अपने आदेश में कहा, “इस तरह के अपराधों का गहरा सामाजिक प्रभाव होता है। इस तरह के मामलों में, नाबालिग लड़कियों के अपहरण की बढ़ती घटनाएं देखी जाती हैं, जिनके साथ शादी की आड़ में यौन उत्पीड़न किया जाता है।”

यह फैसला 30 नवंबर को सार्वजनिक किया गया।

अदालत ने पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता होने के बावजूद शादी के बहाने 14 वर्षीय लड़की का अपहरण और यौन उत्पीड़न करने के आरोप में दोषी ठहराए जाने और सजा के खिलाफ एक व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

लड़की ने अपने बयान में कहा था कि जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी, तब वह आदमी उसका पीछा करता था और उनके बीच दोस्ती हो गई। वह उसे दिल्ली से बाहर ले गया और शादी करने का झांसा देकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए।

उसने कहा कि उन्होंने बिहार में शादी कर ली और फर्जी पहचान पर दिल्ली में रहने लगे। उसने कहा कि जो कुछ हुआ उससे उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई और उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

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