कन्नूर/इडुक्की, छह जून केरल के वन मंत्री ए. के. शशिंद्रन ने कहा कि प्रत्येक संरक्षित वन के चारों ओर एक किलोमीटर के दायरे में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) लागू करने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश से केरल के लोगों, विशेष रूप से वन क्षेत्रों के करीब रहने या काम करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर राज्य के लोगों के साथ है।
कन्नूर में पत्रकारों से बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुसार ईएसजेड के भीतर न तो खनन गतिविधियों और न ही किसी स्थायी संरचना की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे जिनकी जमीन ऐसे क्षेत्रों के पास है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कभी भी राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों सहित वन क्षेत्रों की रक्षा के खिलाफ नहीं रही और इसके साथ ही वह हमेशा यह भी चाहती है कि बसे हुए स्थानों को इस तरह के निर्देशों से छूट दी जाए।
शशिंद्रन ने कहा कि राज्य में 23 ऐसे स्थान हैं जो अदालत के निर्देश से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र इन 23 स्थानों में से 20 को किसी भी ईएसजेड की सीमा के भीतर लाने से छूट देने के राज्य के अनुरोध को अनुमति देने वाला था।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसे लागू करने में आने वाली समस्याओं के बारे में केंद्र को सूचित करेगी और वह समस्या के कानूनी और राजनीतिक समाधान दोनों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर लोगों के साथ हैं।”
इस बीच, शीर्ष अदालत के निर्देश से प्रभावित होने वाले लोग इसका विरोध कर रहे हैं। राज्य के इडुक्की जिले में ‘हाई रेंज प्रोटेक्शन कमेटी’ ने न्यायालय के निर्देश का विरोध किया है।
समिति के संयोजक ने एक टीवी चैनल से कहा कि जहां तक इडुक्की की बात है तो यह एक खतरनाक फैसला है तथा पर्यावरण संगठनों और वन विभाग की कथित साजिश का नतीजा है।
उन्होंने कहा कि जिले के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे और इसका कड़ा विरोध करेंगे क्योंकि यह उनके लिए अस्तित्व का सवाल है। उन्होंने केंद्र और राज्य से न्यायालय के निर्देश की भरपाई के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।
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