नयी दिल्ली, 28 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय वायु सेना के एक एयरमैन की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में उच्च शिक्षा हासिल करने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा कि वह अध्ययन अवकाश संबंधी याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करने की इच्छुक नहीं है।
एयरमैन वायुसेना में रखरखाव, हवाईपट्टी, संचार, मानव संसाधनों के प्रबंधन, सुरक्षा, अग्निशमन तथा विशेष वाहन चलाने आदि के लिए सहायक कर्मचारी होते हैं।
वायुसेना केवल उन अधिकारियों को ही अध्ययन अवकाश की अनुमति देती है जिन्होंने 15 साल की सेवा पूरी कर ली हो और उनका अध्ययन बल के लिए फायदेमंद हो।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले पर भरोसा किया जिसमें कहा गया था कि भारतीय वायुसेना ने अध्ययन अवकाश देने के लिए एक नीति का पालन किया जिससे हटना स्वीकार्य नहीं होगा।
सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि निचली अदालतें भले ही नीति से संतुष्ट नहीं हों लेकिन अगर कोई संशोधन करना होगा तो वह भारतीय वायुसेना द्वारा ही किया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक फैसले में कहा, ‘‘बीके वर्मा मामले में सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों के मद्देनजर... याचिकाकर्ता को कोई अध्ययन अवकाश देने की अनुमति नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने आगे कहा है कि भले ही यह अदालत नीति से असंतुष्ट हो लेकिन इसमें संशोधन, यदि कोई हो, तो केवल वायु सेना द्वारा किया जा सकता है, अदालत द्वारा नहीं।”
एयरमैन ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उच्च शिक्षा के लिए आईआईएम, जम्मू में प्रवेश लेने की अनुमति के अनुरोध वाले अंतरिम आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।
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