चेन्नई, 25 अगस्त मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को कर संग्रह को सुव्यवस्थित और मजबूत करने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों के नेतृत्व में सभी जिलों में कराधान समितियों का गठन करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम ने नमक्कल जिले के वलयाकरनूर में एसएसएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की याचिका का निपटारा करते हुए हाल ही में यह निर्देश दिया। याचिका में कॉलेज से अधिभार की मांग करने वाले थाट्टनकुट्टई ग्राम पंचायत के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि निजी शिक्षण संस्थान विभिन्न रूपों में अत्यधिक शुल्क जमा कर रहे हैं और भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
ये संस्थान ज्यादातर व्यावसायिक संस्थानों के रूप में कार्य कर रहे हैं। हालांकि, वे ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर का भुगतान करने में अनिच्छुक थे, जिसके लिए आय का कोई अन्य स्रोत नहीं था। पंचायतों के लिए शहरी क्षेत्रों के समान ग्राम पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए करों का संग्रह महत्वपूर्ण है।
न्यायाधीश ने कहा कि दुख की बात है कि आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी, कई गांवों में आधारभूत सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी है। न्यायाधीश ने कहा कि कर वसूली के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती क्योंकि उक्त राजस्व से संवैधानिक लक्ष्यों को हासिल किया जाना है।
न्यायाधीश ने सरकार को कराधान समितियां गठित करने का निर्देश दिया और कहा कि जिलाधिकारियों को संपत्ति कर निर्धारण की समीक्षा करनी चाहिए।
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