नयी दिल्ली, 27 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के निलंबित सचिव अशोक अरोड़ा से कहा कि वह बार के सदस्यों के उन कथित मानहानि कारक बयानों को बतायें जिनकी वजह से उन्हें मानसिक यंत्रणा पहुंची और उनका उत्पीड़न हुआ।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से सुनवाई के दौरान अशोक अरोड़ा से कहा कि सभी प्रतिवादियों के खिलाफ कार्रवाई की वजह बतायें।
अदालत ने कहा, ‘‘हमें बतायें कि इसमें मानहानि कैसे हुयी? आप अपने पहले के वाद में भी मानहानि का दावा कर सकते हैं।’’ अदालत ने कहा कि प्रत्येक प्रतिवादी के बयानों में मानहानि कारक तत्व बतायें।
अदालत ने इसके साथ ही अरोड़ा का वाद 27 अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दिया। इस वाद में आरोड़ा ने उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे और उपाध्यक्ष कैलाश वासुदेव सहित 19 पदाधिकारियों से पांच करोड़ रूपए के मुआवजे की मांग की है।
इस वाद में अरोड़ा ने इन सभी को ऐसी सामग्री जारी करने, प्रकाशित करने या वितरित करने से रोकने का भी अनुरोध किया है जो उनकी बदनामी करने वाली हो।
अरोड़ा ने बार एसोसिएशन के सचिव पद से निलंबित किये जाने की कार्यवाही को चुनौती देते हुये भी अलग से एक वाद दायर कर रखा है।
अदालत ने तीन जुलाई को एससीबीए और बार काउन्सिल आफ इंडिया को अरोड़ा के इस वाद में समन और एक आवेदन पर नोटिस जारी किये थे।
भाशा अनूप
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