अदालत ने पुलिस से एआईएमआईएम समर्थक के घृणा भाषण का वीडियो हटाने को कहा
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मुंबई, 24 मई बंबई उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया है कि एआईएमआईएम समर्थक अबू फैजल द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो को हटाया जाए जिसमें कथित तौर पर दो धार्मिक समुदायों के बीच हिंसा और नफरत भड़काने का प्रयास किया गया है।

न्यायमूर्ति आर डी धानुका और न्यायमूर्ति अभय आहूजा की खंडपीठ ने शुक्रवार को इमरान खान नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में पुलिस को फैजल के खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरती भाषण डालने के मामले में कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फैजल असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन का समर्थक है।

याचिका में मांग की गयी है कि दो सप्ताह पहले फैजल द्वारा अपलोड किए गए वीडियो को हटाया जाए और उस पर सोशल मीडिया पर कुछ भी डालने पर स्थायी रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना नहीं घटे।

याचिका के अनुसार वीडियो दो धार्मिक समुदायों के बीच हिंसा भड़का सकता है। वीडियो में फैजल को एक समुदाय विशेष के सदस्यों से कहते सुना जा सकता है कि कोविड-19 से निपटने के लिए काम कर रहे दूसरे समुदाय के डॉक्टरों को मारा-पीटा जाए।

पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि आरोपों की पड़ताल की जाए और यूट्यूब एवं फेसबुक पर अपलोड वीडियो क्लिप को देखा जाए।

पुलिस को फैजल के खिलाफ जांच करने का निर्देश भी दिया गया है।

अदालत ने फैजल द्वारा सोशल मीडियाा के अन्य माध्यमों पर पोस्ट किए गए इस तरह के वीडियों और क्लिप को हटाने के निर्देश दिए हैं।

मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 जून की तारीख तय की गई है।

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