नयी दिल्ली, आठ अगस्त उच्चतम न्यायालय प्रशासन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण शौरी, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और कार्यकर्ता एवं वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका को सूचीबद्ध करने को लेकर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें उन्होंने आपराधिक अवमानना से जुड़े़ एक कानूनी प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर शनिवार सुबह में लगाई गई कॉज लिस्ट के मुताबिक याचिका पर दस अगस्त को न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की पीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंस से सुनवाई होनी है।
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उच्चतम न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि याचिका को स्थापित परंपरा के मुताबिक इस तरह के मामलों पर सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए था।
एक विश्वस्त सूत्र ने बताया, ‘‘परंपरा और प्रक्रिया के मुताबिक इस मामले को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए था जो इस तरह के मामलों की पहले से सुनवाई कर रही हो, लेकिन इसे परंपरा और प्रक्रिया की अनदेखी कर सूचीबद्ध किया गया है। इस बारे में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।’’
बहरहाल, कुछ समय बाद मामले को उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट की काउज लिस्ट से हटा दिया गया।
राम, शौरी और भूषण ने अपनी याचिका में ‘‘अदालत की निंदा’’ के लिए आपराधिक अवमानना से जुड़े एक कानूनी प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है और कहा है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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