(गौरव सैनी)
नयी दिल्ली, चार अगस्त राष्ट्रमंडल महासचिव पैट्रिशिया स्कॉटलैंड ने कहा है कि अजरबैजान के बाकू में आयोजित होने वाली सीओपी29 जलवायु वार्ता जलवायु कार्रवाई और वित्त संबंधी खाई को पाटने का एकमात्र मौका है।
स्कॉटलैंड ने जूम के माध्यम से ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में जीवाश्म ईंधन उत्पादकों को सहयोगी बनाना महत्वपूर्ण है।
अजरबैजान इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता की मेजबानी कर रहा है। यह देश तेल और गैस का निर्यात करता है।
स्कॉटलैंड ने कहा, ‘‘ हम चरम सीमा के करीब पहुंच रहे हैं जो 1.5 डिग्री सेल्सियस है। बल्कि कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि हम वहां पहुंच चुके हैं। हमारा घर, हमारा ग्रह सचमुच जल रहा है। हम देख रहे हैं कि कार्रवाई करने के बजाय उत्सर्जन, वित्तीय उपलब्धता आदि के क्षेत्र में खाई बढ़ रही है । इन अंतरों को पाटना हमारा कर्तव्य है और सीओपी एकमात्र मौका है। यह (वार्ता) ऐसे समय में हो रही है जब इसकी बहुत अधिक आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि अमीर देशों ने 2009 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था जो सागर में एक बूंद के समान है, लेकिन ‘‘हमें अभी यह भी नहीं मिला है।’’
जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार अमीर देशों ने 2009 में विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद के लिए 2020 तक प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डालर जुटाने का संकल्प लिया था।
यह लक्ष्य फिलहाल पूरा नहीं हुआ है। अधिकांश वित्तीय सहायता बाजार दरों पर ऋण के रूप में प्रदान की गई है, जिससे गरीब और कमजोर देशों पर ऋण का बोझ बढ़ रहा है। इन देशों को अब जलवायु संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए खरबों डॉलर की आवश्यकता है।
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