विदेश की खबरें | सीओपी28 : जलवायु रक्षा और बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिए कृषि क्षेत्र में सात नवाचारों की आवश्यकता
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

नोट्रे डेम (अमेरिका), तीन दिसंबर (द कन्वरसेशन) साल 2023 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन में खाद्य पदार्थों और कृषि को केंद्र में रखा गया और इस पर चर्चा की गयी।

इस सम्मेलन में एक दिसंबर को 130 से अधिक देशों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये और सभी देशों ने अपनी खाद्य प्रणालियों - उत्पादन से उपभोग तक के सब चरणों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीतियों का केंद्र बिंदु बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।

यह घोषणापत्र जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने और कॉर्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस कार्रवाइयों के बारे में नहीं बल्कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करता है।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक गर्मी पड़ने और तूफान के कारण वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृखंला को व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। अत्यधिक गर्मी और तूफान भी जलवायु परिवर्तन में प्रमुख योगदानकर्ता हैं, जो मानव गतिविधियों से होने वाले सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के एक तिहाई के लिए जिम्मेदार है।

यही कारण है कि जलवायु को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली चर्चाओं में कृषि नवाचार को तेजी से महत्व दिया जा रहा है। वर्तमान में, कृषि उत्पादन दुनिया के आठ अरब लोगों के लिए पर्याप्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है, हालांकि कई लोगों की इस तक पर्याप्त पहुंच नहीं है।

लेकिन वर्ष 2050 में दुनिया की 10 अरब की आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कृषि भूमि को 2010 की तुलना में 6,60,000 से बढ़ाकर 12 लाख वर्ग मील तक विस्तारित करने की आवश्यकता होगी। इससे वनों की अधिक कटाई होगी, जो जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है।

इसके अलावा, पर्याप्त खाद्य पदार्थों का उत्पादन करने के लिए व्यापक रूप से कृत्रिम उर्वरकों का इस्तेमाल भी बढ़ाना होगा, जो जलवायु परिवर्तन की एक वजह है।

वैकल्पिक समाधानों के बिना केवल वनों की कटाई और इन प्रथाओं को समाप्त करने से दुनिया की खाद्य आपूर्ति और किसानों की आय में कमी आएगी। सौभाग्य से, कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचार उभर रहे हैं जो खाद्य पदार्थों का उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर द्वारा स्थापित जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं कृषि के लिए नवाचार आयोग की एक नयी रिपोर्ट के मुताबिक कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए प्राथमिकता वाले सात क्षेत्रों की पहचान की गयी है, जो पर्याप्त खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और लाखों लोगों तक खाद्य पदार्थों की पहुंच को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

मैं एक कृषि अर्थशास्त्री और आयोग का कार्यकारी निदेशक हूं। कृषि क्षेत्र में तीन नवाचार विशेष रूप से तेजी से उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक रूप से फायदा पहुंचाने की अपनी क्षमता के लिए विशिष्ट हैं।

सटीक और सुलभ मौसम पूर्वानुमान-------------

मौसम संबंधी अप्रत्याशित घटनाओं के कारण फसलें तेजी से कमजोर हो रही हैं और किसान इस समस्या से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए सटीक मौसम पूर्वानुमान महत्वपूर्ण हैं। रोपण, सिंचाई, खाद और कटाई के बारे में रणनीतिक निर्णय लेने के लिए किसानों को यह जानने की जरूरत है कि आने वाले और एक निश्चित समय अवधि के दौरान किस प्रकार का मौसम होगा।

फिर भी कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में किसानों के लिए सटीक, विस्तृत मौसम पूर्वानुमान तक पहुंच दुर्लभ है।

हमारे आकलन से पता चलता है कि मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करने और पूर्वानुमानों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी में निवेश करना - जैसे कि रेडियो, संदेश या व्हाट्सएप के माध्यम से - अर्थव्यवस्थाओं के लिए कई गुना फायदेमंद हो सकता है।

उदाहरण के लिए, मौसमी मानसून वर्षा के कुल राज्य-स्तरीय पूर्वानुमानों से भारतीय किसानों को बुआई और रोपण के सही समय को जानने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय कृषि क्षेत्र को 50 लाख डॉलर खर्च कर तीन अरब डॉलर का लाभ हो सकता है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की जलवायु सेवा सूचना प्रणाली जैसे मंचों का उपयोग करके पड़ोसी देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करने से भी पूर्वानुमानों में सुधार हो सकता है।

माइक्रोबियल उर्वरक---------------

कृषि क्षेत्र में एक अन्य नवाचार प्राथमिकता के साथ माइक्रोबियल उर्वरकों के उपयोग का विस्तार शामिल है।

फसल की पैदावार को बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन के उर्वरक का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, लेकिन यह आमतौर पर प्राकृतिक गैस से बनाया जाता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक प्रमुख स्रोत है। माइक्रोबियल उर्वरक पौधों और मिट्टी को उनके लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करने के लिए बैक्टीरिया का उपयोग करते हैं, जिससे आवश्यक नाइट्रोजन उर्वरक की मात्रा कम हो जाती है।

अध्ययनों से पता चला है कि माइक्रोबियल उर्वरक स्वस्थ मिट्टी में फलियों की पैदावार 10 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और अरबों डॉलर का लाभ कमा सकते हैं। अन्य माइक्रोबियल उर्वरक मकई के उत्पादन में मदद करते हैं और वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं।

ब्राजील में सोयाबीन की खेती करने वाले किसान अपनी पैदावार में सुधार और कृत्रिम उर्वरकों की लागत में कटौती के लिए दशकों से राइजोबिया-आधारित माइक्रोबियल उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह तकनीक अन्यत्र उतनी व्यापक रूप से ज्ञात नहीं है।

पशुधन से मीथेन के उत्पादन को कम करना-----------

तीसरी नवाचार प्राथमिकता पशुधन है, जो कृषि के लगभग दो-तिहाई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का स्रोत है। साल 2050 तक दुनिया में गोमांस की मांग 80 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है क्योंकि निम्न और मध्यम आय वाले देश अमीर हो रहे हैं, इसलिए पशुधन से होने वाले उत्सर्जन को कम करना आवश्यक है।

पशुधन से होने वाले मीथेन गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए कई नए तरीके उन कारणों को लक्षित करते हैं, जिससे मीथेन डकारें आती हैं।

मवेशियों के चारे में शैवाल, समुद्री शैवाल, लिपिड, टैनिन या कुछ कृत्रिम यौगिक मिलाने से पाचन के दौरान मीथेन उत्पन्न करने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव आ सकता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)