विदेश की खबरें | सीओपी28: भारत ने पेरिस समझौते को अक्षरश: लागू करने की अपील की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

(फोटो के साथ)

दुबई, 13 दिसंबर भारत ने बुधवार को वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी28 में विश्व के नेताओं से ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ प्रक्रिया के माध्यम से पेरिस समझौते को अक्षरश: लागू करने का अनुरोध किया। इस दौरान भारत ने समानता और जलवायु न्याय के सिद्धांतों पर भी जोर दिया।

सीओपी28 में एक ऐतिहासिक जलवायु समझौता हुआ है जिसमें जीवाश्म ईंधन का उपयोग चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और ऊर्जा प्राप्त करन के तरीके में बदलाव करने की अपील की गई है।

सीओपी28 के समापन सत्र में पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि सम्मेलन के दौरान हुए सामूहिक प्रयासों ने पेरिस में निर्धारित तापमान लक्ष्यों को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करके दुनिया को सकारात्मक संकेत दिये हैं।

उन्होंने कहा, "आगे का रास्ता समानता और जलवायु न्याय पर आधारित होना चाहिए, आइए हम ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ प्रक्रिया के माध्यम से पेरिस समझौते को अक्षरश: लागू करें।"

लगभग दो सप्ताह तक गहन बातचीत के बाद पहला ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ समझौता हुआ है, जिसमें देशों से आग्रह किया गया है कि वे कोयले से बिजली बनाने को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयासों में तेजी लाएं। इससे पहले भारत और चीन ने कोयले के इस्तेमाल में कटौती का कड़ा विरोध किया था।

‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ से आशय उस प्रक्रिया से है जिसके तहत हम पता लगाते हैं कि वैश्विक स्तर पर देशों ने सामूहिक रूप से जलवायु कार्रवाई के मोर्चे पर कितनी प्रगति की है।

समापन सत्र में संबोधन के बाद यादव ने ‘एक्स’ पर लिखा कि दुनिया दुबई में आयोजित सीओपी28 में एक साथ आई थी और यह एक हरित व स्वस्थ ग्रह के प्रति कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण के लिए "सकारात्मक सहयोग और सौहार्द" को दर्शाता है।

उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपनी जी20 अध्यक्षता के माध्यम से, भारत ने जलवायु कार्रवाई को एक सहयोगी प्रक्रिया बनाने का संकल्प प्रदर्शित किया, जिसमें कोई पीछे न रहे। सीओपी28 में, भारत ने वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत में निहित उसी भावना को बढ़ावा दिया।”

उन्होंने कहा, “हम राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार वैश्विक भलाई के लिए कार्रवाई करने को लेकर पेरिस समझौते में निहित मौलिक सिद्धांतों को दोहराते हुए सीओपी28 में हुए समझौते का समर्थन करते हैं।”

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