नयी दिल्ली, 16 जून जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने शुक्रवार को कहा कि एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों कसे तर्कसंगत बनाए जाने से जुड़ा हालिया विवाद "अनुचित" है और संशोधित पाठ्यक्रम में नयी "खोज और ज्ञान" को शामिल किया जाना चाहिए।
पंडित ने पीटीआई-वीडियो से कहा कि पाठ्यपुस्तकों को तर्कसंगत बनाए जाने के बाद हालिया घटनाक्रम ऐसी संस्कृति का हिस्सा है जहां एक वर्ग का मानना है कि उनकी राय ही अंतिम होनी चाहिए तथा किसी और को राय रखने का अधिकार नहीं है।
कुलपति ने कहा, "एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक को लेकर हालिया विवाद पूरी तरह से अनुचित है। इसका कारण यह है कि कोई भी किताब किसी एक लेखक की लिखी नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि यह बहुत ही 'दुर्भाग्यपूर्ण' है कि नेतागण इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ये वे लोग हैं जो पाठ्यक्रम को तर्कसंगत बनाते हैं, पाठ्यक्रम का पुनरीक्षण बहुत जरूरी है। पिछली बार 2006 में संशोधन किया गया था और वह हमेशा के लिए नहीं रह सकता। आपको नयी खोजों और ज्ञान के अनुसार बदलते रहना होगा।’’
एक दिन पहले ही, शिक्षाविदों के एक समूह ने राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को पत्र लिखकर पाठ्यपुस्तकों से अपना नाम हटाने की मांग करते हुए कहा था कि उनका सामूहिक रचनात्मक प्रयास खतरे में है।
कुछ दिन पहले ही राजनीति शास्त्र के विशेषज्ञों सुहास पालसीकर और योगेन्द्र यादव ने पुस्तकों से मुख्य सलाहकार के रूप में उनका नाम हटाने को कहा था।
बृहस्पतिवार को 73 शिक्षाविदों ने एक संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि एनसीईआरटी को बदनाम करने की पिछले तीन महीने से जानबूझकर कोशिश की जा रही है और यह ‘‘शिक्षाविदों के बौद्धिक अहंकार को दर्शाता है जो चाहते हैं कि छात्र 17 साल पुरानी पाठ्यपुस्तकों को ही पढ़ते रहें।’’
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