नयी दिल्ली, 28 फरवरी दूरसंचार सचिव नीरज मित्तल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार 5जी निवेश पर रिटर्न से संबंधित चुनौतियां दूर करने और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विस्तार की जरूरत पर विचार कर रही है।
मित्तल ने यहां इक्रियर प्रोसस के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में औसत डेटा रफ्तार बढ़कर 151 मेगाविट प्रति सेकंड (एमबीपीएस) हो गई है जबकि सितंबर में यह लगभग 99-100 एमबीपीएस थी। औसतन एक व्यक्ति हर महीने लगभग 29 गीगाबाइट डेटा का उपभोग करता है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग मनोरंजन के उद्देश्य से डेटा का उपभोग कर रहे हैं जिससे दूरसंचार बुनियादी ढांचे को लगातार बढ़ाने की जरूरत पड़ रही है।
दूरसंचार सचिव ने कहा, "हम स्पेक्ट्रम पर बहुत दबाव देखने वाले हैं क्योंकि डेटा प्रवाह बढ़ता है, हमें मोबाइल उपयोग और ब्रॉडबैंड के लिए नए स्पेक्ट्रम तलाशने होंगे। इसके साथ ही 5जी से 6जी की तरफ जाने पर बहुत अधिक पूंजीगत व्यय की भी जरूरत होगी।"
इसके साथ ही मित्तल ने कहा कि 5जी स्पेक्ट्रम पर किए जा चुके निवेश पर समुचित रिटर्न नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा, "हमने 5जी नेटवर्क तैयार करने पर बहुत पैसा खर्च किया है। लेकिन हमें 4जी से 5जी में आने पर सिर्फ तेज रफ्तार ही देखने को मिली है।"
निजी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने अगली पीढ़ी की 5जी सेवाओं के कवरेज का विस्तार करने के लिए सिर्फ 2024 में ही दूरसंचार बुनियादी ढांचे और रेडियोवेव परिसंपत्तियों में लगभग 70,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मित्तल ने कहा कि दूरसंचार उपकरणों का किफायती होना एक और चुनौती है क्योंकि देश में बहुत से लोग इस बोझ को नहीं उठा सकते हैं।
मित्तल ने कहा, "ये ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर सरकार विचार कर रही है और समय के साथ इन सभी पर काम करेगी।"
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