देश की खबरें | कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिहं हुड्डा ने हरियाणा सरकार के ‘किसान मित्र’ नियुक्त करने के फैसले पर सवाल उठाया
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चंडीगढ़, 12 जून हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को 17 हजार ‘किसान मित्र’ नियुक्त करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि भाजपा को पहले किसानों का मित्र बनना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने किसानों को वित्तीय प्रबंधन और कृषि प्रबंधन में मदद करने के लिए ‘किसान मित्र’ की नियुक्ति करने की घोषणा की है।

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हुड्डा ने कहा, ‘‘ किसान मित्रों की नियुक्ति का क्या फायदा जब सरकार ही किसान विरोधी है? सरकार को नये जुमले गढ़ने से पहले किसान विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ सभी मंत्रियों, अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को पहले किसानों के मित्र की तरह व्यवहार करना चाहिए, लेकिन सरकार इसमें असफल नजर आती है और यही कारण है कि वह किसान मित्र नियुक्त कर रही है। सरकार के इरादे और नीतियों को देखकर लगता है कि किसानों को इसका फायदा नहीं मिलेगा।’’

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उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को ‘किसान मित्र क्लब’ योजना लागू करने की घोषणा की थी जिसके तहत राज्य के 17 लाख किसानों के लिए 17 हजार किसान मित्रों को नियुक्ति की जाएगी।’’

योजना के तहत ‘किसान मित्र’ सरकारी अधिकारी, प्रगतिशील किसान और स्वयंसेवी होंगे और बेहतर वित्तीय प्रबंधन और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि की आधुनिक तकनीकों को अपनाने में किसानों की मदद करेंगे।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने कहा कि किसानों को आज सरकार से राहत और प्रोत्साहन की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार किसानों का मित्र बनना चाहती है तो उसे किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए, फसलों की उचित कीमत दिलानी चाहिए, कृषि लागत कम करनी चाहिए और कृषि उपकरणों पर कर हटाना चाहिए। सरकार को डीजल की कीमत में कमी लानी चाहिए जो रोजाना बढ़ रही है और इनसब के ऊपर किसानों का कर्ज माफ करने के लिए कदम उठाना चाहिए।’’ हुड्डा ने कहा कि यह किसानों की मांग है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बयान में कहा कि किसानों को राहत देने और प्रोत्साहित करने के स्थान पर सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे कृषि लागत बढ़ रही है, फसल की खरीद रोक रही है और किसानों पर पाबंदियां लगा रही है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ‘किसान मित्र’ नियुक्त ही करना चाहती है तो उसे हरियाणा के कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे बेरोजगारों को नियुक्त करना चाहिए न कि स्वयंसवेकों को।

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