देश की खबरें | कांग्रेस ने ‘वोट बैंक की राजनीति’ के कारण तीन तलाक के खिलाफ कानून नहीं बनाया : केंद्रीय मंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाए जाने का एक साल होने पर कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अस्सी के दशक में ही यह कानून बन सकता था लेकिन कांग्रेस इस पर वोटों की राजनीति करती रही ।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 31 जुलाई केंद्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाए जाने का एक साल होने पर कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अस्सी के दशक में ही यह कानून बन सकता था लेकिन कांग्रेस इस पर वोटों की राजनीति करती रही ।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने एक कार्यक्रम के दौरान वीडियो लिंक के जरिए देश भर की मुस्लिम महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि तीन तलाक या ‘तलाक-ए-बिद्दत’ न तो ‘‘इस्लामिक था और न ही कानूनी’’ लेकिन इसके बावजूद ‘‘वोट बैंक के व्यापारियों’’ ने इस सामाजिक बुराई को ‘‘राजनीतिक संरक्षण’’ दिया।

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उन्होंने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून को 1980 में ही पारित किया जा सकता था जब उच्चतम न्यायालय ने शाह बानो मामलों में ऐतिहासिक फैसला दिया था।

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 मुस्लिम पति द्वारा दिए जाने वाले तलाक-ए-बिद्दत यानी कि तीन तलाक को गैर कानूनी बताता है। कानून कहता है कि अगर कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक रूप से, लिखकर या इलेक्ट्रॉनिक रूप में या किसी भी अन्य विधि से तलाक-ए-बिद्दत देता है तो यह अवैध माना जाएगा ।

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नकवी ने कहा, ‘‘कांग्रेस के पास 545 लोकसभा सदस्यों में से 400 और राज्यसभा में 245 में से 159 से अधिक सदस्यों के साथ पूर्ण बहुमत था लेकिन राजीव गांधी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को अप्रभावी बनाने के लिए संसद में अपनी ताकत का इस्तेमाल किया और मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों से वंचित किया।’’

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी नकवी की राय से सहमति जताते हुए कहा कि 1980 के दशक में संसद में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या थी । अगर वे चाहते तो मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में न्याय कर सकते थे लेकिन उनके लिए तब वोट बैंक ज्यादा महत्वपूर्ण था।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके लिए राजनीतिक वजूद ज्यादा मायने रखता था और उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी सुधारने के मकसद से कभी काम नहीं किया । ’’

ईरानी ने कहा कि तीन तलाक के मुद्दे पर अदालत जाने वाली मुस्लिम महिलाओं ने असली लड़ाई लड़ी , इससे ना केवल उन्हें बल्कि समुदाय की दूसरी महिलाओं को भी इंसाफ मिला ।

उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब मुस्लिम महिलाएं भी डिजिटल साक्षरता में कदम ताल करेंगी ।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी मुस्लिम महिलाओं को संबोधित किया और पूछा कि भारत को तीन कलाक के खिलाफ कानून लाने में 70 साल क्यों लग गए ? उन्होंने पूछा, ‘‘तीन तलाक कानून पर मतभेद क्यों थे?’’

परोक्ष रूप से कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ नरेंद्र मोदी की राजनीति है और दूसरी तरफ वो राजनीति है जो शाहबानो से लेकर शायरा बानो तक ठहरी हुई है।’’

प्रसाद ने तीन तलाक के मुद्दे पर कदम नहीं उठाने और मोदी सरकार द्वारा विधेयक लाए जाने पर इसका विरोध करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भी आलोचना की ।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून महिलाओं के अधिकार और आत्मसम्मान का कानून है ।

नकवी ने कहा कि एक अगस्त वह दिन है जब मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की सामाजिक बुराई से मुक्ति मिली और इसे देश के इतिहास में ‘मुस्लिम महिलाओं के अधिकार दिवस’ के तौर पर दर्ज किया गया।

नकवी ने कहा कि मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया।

उन्होंने कहा, ‘‘तीन तलाक के खिलाफ कानून बने एक साल बीत चुका है और उसके बाद से तीन तलाक के मामलों में करीब 82 फीसदी की गिरावट आयी है। अगर ऐसा कोई मामला आया भी तो इस कानून के तहत कार्रवाई हुई।’’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए समर्पित है ना कि ‘राजनीतिक शोषण’ के लिए ।

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