देश की खबरें | चिकित्सा शिक्षा के शुल्क ढांचे में बदलाव के लिए कांग्रेस ने हरियाणा सरकार की आलोचना की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हरियाणा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के शुल्क में वृद्धि के लिये कांग्रेस ने रविवार को राज्य सरकार की आलोचना की। कांग्रेस ने कहा कि सरकार के इस कदम से गरीब माता-पिता के बच्चों के सपने चकनाचूर हो जाएंगे।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चंडीगढ़, आठ नवंबर हरियाणा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के शुल्क में वृद्धि के लिये कांग्रेस ने रविवार को राज्य सरकार की आलोचना की। कांग्रेस ने कहा कि सरकार के इस कदम से गरीब माता-पिता के बच्चों के सपने चकनाचूर हो जाएंगे।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 2020—21 के एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये शिक्षा शुल्क में वृद्धि करने के निर्णय को ''तुगलकी फरमान'' करार दिया ।

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उन्होंने कहा, ''...इस कदम से कई गरीब बच्चों के माता-पिता के सपने चकनाचूर हो जायेंगे।''

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मीडिया को संबोधित करते हुये कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि राज्य ने सरकारी कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा के शुल्क को 'बढ़ा' दिया है।

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उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये शुल्क बढ़ा कर सालाना दस लाख रुपये कर दिया है, जो पूरे पाठ्यक्रम के लिये 40 लाख रुपये हो जायेगा ।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चिकित्सा शिक्षा शुल्क के ढांचे में बदलाव के साथ छात्रों को अब चार साल में 3.71 लाख रुपये देने होंगे। इसके अलावा छात्रों को कर्ज की राशि के तौर पर 36,28,270 रुपये भी चुकाने पड़ेंगे।

उन्होंने कहा, ''क्या किसी गरीब माता-पिता के बच्चे डॉक्टर बनने के लिये यह कीमत चुका सकते हैं ।’’

सुरजेवाला ने कहा कि इससे पहले यह शुल्क लगभग 53,000 रुपये सलाना था। इसके अलावा हॉस्टल का खर्च 15,000-20,000 रुपये था।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में डॉक्टर बनने के लिये कुल फीस करीब तीन लाख रुपये थी ।

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, चिकित्सकों के पेशे को प्रोत्साहित करने के बारे में एक नीति लायी गयी है, ताकि वे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में हरियाणा सरकार की चिकित्सा सेवा अथवा सरकारी मेडिकल कॉलेजों का विकल्प चुनें।

इस नीति के तहत एमबीबीएस डिग्री कोर्स के लिए चयनित उम्मीदवारों को 10 लाख रुपये का वार्षिक बॉन्ड भरना होगा, जिसका भुगतान प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में किया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि उम्मीदवार को बॉन्ड राशि के लिए शिक्षा ऋण की सुविधा का विकल्प देने के साथ ही राज्य सरकार एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी मिलने की स्थिति में उम्मीदवारों के कर्ज की किस्त चुकाएगी।

इसमें यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार बॉन्ड की राशि और शुल्क का स्वयं भी भुगतान कर सकते हैं ।

सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम का शुल्क 15 लाख रुपये से 18 लाख रुपये के बीच है ।

उन्होंने कहा कि सरकार के इस 'युवा विरोधी' कदम से डॉक्टर बनने के इच्छुक उम्मीदवार निजी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन कराने के लिये मजबूर होंगे ।

उन्होंने यह भी कहा कि निजी मेडिकल कॉलेज भी सरकार की राह पर चलेंगे ।

कांग्रेस नेता ने कहा, ''राज्य सरकार अगर इस निर्णय को वापस नहीं लेती है तो हम इसे अदालत में चुनौती देंगे ।''

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