बेंगलुरु, दो अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी संजना रघुनाथ को खेल कोटे के तहत पात्र होने के बावजूद एमबीबीएस सीट देने से मना करने पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह खिलाड़ी को 10 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान करे।
खिलाड़ी के अधिवक्ता ने बताया कि बेंगलुरु की निवासी एवं 2018 ‘एशिया यूथ शतरंज चैंपियनशिप’ में भाग लेने वाली संजना को नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिक प्रतिष्ठित पी-एक के बजाय खेल कोटा के पी-पांच श्रेणी में गलत तरीके से रखा गया।
मुख्य न्यायाधीश एन वी अंजारिया और न्यायमूर्ति के वी अरविंद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि इस गलत वर्गीकरण से खेल कोटा संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ।
संजना ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिसमें एफआईडीई शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना भी शामिल है। उन्होंने सीट से वंचित होने के बाद याचिका दायर की थी।
अदालत ने पाया कि जून 2023 में जारी कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) का परिपत्र 2009 में बनाए गए नियमों के विरुद्ध था।
अदालत ने कहा कि गलती के कारण संजना को प्रबंधन कोटे के तहत एक निजी मेडिकल कॉलेज में सीट के लिए लगभग 11 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा, जिससे वह मुआवजे की हकदार है।
अदालत ने राज्य सरकार को अवसर से वंचित करने के लिए मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये संजना को देने का निर्देश दिया जिसका भुगतान छह सप्ताह के भीतर करना होगा।
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