नयी दिल्ली, 22 अगस्त उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त एक समिति ने सर्वोच्च अदालत से मणिपुर सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) सहित अन्य को कई निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है, ताकि विस्थापितों को आधार कार्ड उपलब्ध कराना सुनिश्चित हो सके तथा पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना का दायरा बढ़ सके।
राज्य के कई निवासियों के अपना पहचान दस्तावेज गंवा देने का उल्लेख करते हुए समिति ने शीर्ष न्यायालय से यह अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति ने विस्थापित लोगों के निजी दस्तावेजों, मणिपुर पीड़ित मुआवजा योजना, 2019 और इसके क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति पर शीर्ष न्यायालय को तीन रिपोर्ट सौंपी हैं।
समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शालिनी पी जोशी और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आशा मेनन भी शामिल हैं।
समिति का गठन राज्य में जातीय हिंसा प्रभावित लोगों को राहत व पुनर्वास की निगरानी के लिए किया गया है।
पूर्व महिला न्यायाधीशों की समिति का गठन, राज्य में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के एक वीडियो पर शीर्ष न्यायालय द्वारा दुख जताने के कुछ दिनों बाद किया गया था।
शीर्ष न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मंगलवार को तीन अलग-अलग रिपोर्ट संबद्ध वकीलों से साझा की गईं। ये रिपोर्ट प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दाखिल की गईं।
न्यायमूर्ति मित्तल समिति ने कहा कि पीड़ितों तक राहत व पुनर्वास उपायों का फायदा पहुंचाने में कई कमियां बाधक बन सकती हैं, इनमें पहला, पहचान के लिए दस्तावेजों की अनुपलब्धता है। इनमें आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र/राशन कार्ड/ बीपीएल कार्ड आदि शामिल हैं।
समिति ने उप महानिदेशक, यूआईडीएआई, क्षेत्रीय कार्यालय, गुवाहाटी और मणिपुर के गृह सचिव को संयुक्त रूप से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है ताकि यूआईडीएआई अधिकारियों के पास जिन विस्थापित लोगों के आधार रिकार्ड उपलब्ध हैं उन्हें आधार कार्ड उपलब्ध कराया जा सके।
पीड़ितों को मुआवजे के मुद्दे पर समिति ने कहा कि मणिपुर पीड़ित मुआवजा योजना, 2019 का दायरा फौरन बढ़ाये जाने की जरूरत है। इसने इस योजना में बदलाव के लिए उपयुक्त संशोधन करने के वास्ते मणिपुर सरकार को निर्देश देने का भी अनुरोध किया।
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