नयी दिल्ली, 28 अप्रैल जैव-विमानन टर्बाइन ईंधन कार्यक्रम पर गठित समिति ने विमानन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
नागर विमानन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई वाली सलाहकार समिति की बैठक में स्वच्छ विमान ईंधन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की गई। इस दौरान कई संसद सदस्य भी मौजूद रहे।
टिकाऊ विमानन ईंधन पर एक समिति का गठन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जिसे विभिन्न पक्षों को वितरित कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में लगा हुआ है। इस क्रम में वर्ष 2050 तक ईंधन दक्षता में सालाना दो प्रतिशत का सुधार करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है और इस दिशा में विमान क्षेत्र से उत्सर्जन को कम करना भी अहम होगा।
मंत्रालय ने स्वच्छ विमानन ईंधन की दिशा में बढ़ाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने पानीपत में लांजाजेट जेट ईंधन प्रौद्योगिकी से 86.8 टीएमटी (हजार मीट्रिक टन) क्षमता वाला एक संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। इसके अलावा इंडियन ऑयल ने एटीजे (अल्कोहल टू जेट) ईंधन के विकास के लिए एक संयंत्र लगाने को पुणे स्थित प्राज इंडस्ट्रीज के साथ एक समझौता भी किया है।
इस बीच नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 0.57 प्रतिशत एसएएफ (स्वच्छ ईंधन) मिश्रण वाले ईंधन से चलने वाली पहली वाणिज्यिक घरेलू उड़ान की इजाजत एयरएशिया इंडिया को दे दी है।
मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कार्बन कटौती योजना के स्वैच्छिक चरण का हिस्सा नहीं है और वह 2027 से इन प्रावधानों का अनुसरण करना शुरू करेगा। कार्बन कटौती योजना का स्वैच्छिक चरण 2021 से ही शुरू है।
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