कोलकाता, पांच जून कोल इंडिया के अधिकारियों के संगठन ने सेंट्रल माइंस प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) को मूल कंपनी से अलग करने के प्रस्ताव पर अप्रसन्नता जाहिर की। संगठन ने व्यापक परामर्श के लिये एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का सुझाव दिया।
ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ एक्जिक्यूटिव्स (एआईएई) कोल इंडिया के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों का संगठन है। संगठन ने प्रस्तावित कदम के खिलाफ अपनी राय को लेकर कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखा है।
कोयला उद्योग के चार ट्रेड यूनियन पहले ही सेंट्रल माइन्स को कोल इंडिया के अलग करने के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान कर चुके हैं।
एआईएई ने पत्र में कहा, "हालांकि, हम सरकार की सोच पर सवाल नहीं उठा सकते, लेकिन हम उसकी सोच के साथ आगे बढ़ने के लिये निश्चित रूप से इस विषय पर व्यापक चर्चा का अनुरोध करेंगे।"
एसोसिएशन के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य 1993 में कोयला क्षेत्र के खुलने के बाद भारत में निजी कंसल्टेंसी कंपनियों के लिये रास्ता साफ करना है।
संगठन के प्रधान महासचिव पीके सिंह राठौर ने कहा, "भले ही लगभग 42 अरब टन के कोयला भंडार वाले खान निजी कंपनियों को आवंटित किये गये, लेकिन इन खदानों से कोयले का उत्पादन मुश्किल से 397.5 लाख टन हो पाया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात का यकीन नहीं है कि कोल इंडिया को छोटी संस्थाओं में विभाजित करने का प्रस्ताव उद्देश्य की पूर्ति करेगा या नहीं, लेकिन निश्चित रूप से यह सीएमपीडीआईएल के अस्तित्व के लिये समस्याएं पैदा करेगा।"
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