नयी दिल्ली, 9 जून फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गठित समिति के सदस्य बिनोद आनंद ने खरीफ फसलों का एमएसपी बढ़ाने की सराहना करते हुए कहा है कि भारत में कृषि अनुसंधान में कृषि जीडीपी का एक प्रतिशत निवेश करने की जरूरत है।
इसके साथ ही उन्होंने सीधे किसानों से खरीद की व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार और मूल्य श्रृंखला के लोकतंत्रीकरण के लिए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) को साथ लेने की भी जोरदार वकालत की।
आनंद ग्रामीण भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों की शीर्ष संस्था सीएनआरआई के महासचिव भी हैं।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने विपणन सत्र 2023-24 के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी करने की घोषणा गत बुधवार को की थी।
आनंद ने शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि सरकार ने ज्वार, बाजरा, रागी और तिल जैसी फसलों की एमएसपी 2014-15 की तुलना में दोगुनी कर दी है, जबकि अन्य फसलों की दरों में 70 से 90 प्रतिशत बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए यह काफी उल्लेखनीय है।
उन्होंने कहा कि कृषि निर्यात पहले के मुकाबले बढ़ा है और इसे आगे और बढ़ाने के लिए भारत को एक क्रियाशील व्यापार नीति की आवश्यकता है।
आनंद ने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार पर कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान में कृषि जीडीपी का कम-से-कम एक प्रतिशत सार्वजनिक निवेश करने की जरूरत है। इससे निजी निवेश आकर्षित करने और सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए सक्षम नीतिगत माहौल बनेगा।
राजेश
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