विदेश की खबरें | जलवायु परिवर्तन : सदी के अंत में तीन से छह दिन पहले झड़ने लगेंगी कुछ वृक्षों की पत्तियां

बर्लिन, 27 नवंबर यूरोपीय वृक्षों पर बड़े पैमाने पर किये गए एक अध्ययन में पता चला है कि पृथ्वी के ऊष्णकटिबंधीय और ध्रुवीय क्षेत्रों के बीच पेड़ों की पत्तियां 21वीं सदी के अंत में अपने तय समय से तीन से छह दिन पहले ही झड़नी शुरू हो जाया करेंगी।

इससे पहले जर्मनी के म्यूनिख विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों समेत कई वैज्ञानिकों ने कहा था कि शोध बताते हैं कि मौजूदा जलवायु संकट चलते इन समशीतोष्ण वृक्षों की पत्तियां गिरने के बाद फिर से उग आएंगी।

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प्रारंभिक अवलोकनों से भी इस विचार को बल मिलता है क्योंकि तापमान में वृद्धि के कारण हाल के दशकों में पेड़ों पर पत्तियां बाद में भी उग आती हैं, जिससे मौसम की समयावधि में वृद्धि हुई है और जलवायु परिवर्तन की दर को धीमा करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि 'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में कहा गया है कि यह प्रवृत्ति बदल सकती है क्योंकि बढ़ती प्रकाश संश्लेषी उत्पादकता से पेड़ों की पत्तियां गिरना या पतझड़ जल्दी शुरू हो जाता है।

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वर्तमान अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने 1948 से 2015 तक प्रमुख मध्य यूरोप की प्रमुख पेड़ प्रजातियों से संबंधित दीर्घकालिक अवलोकनों का उपयोग किया। उन्होंने पतझड़ को प्रभावित करने वाले संबंधित प्रभावों का आकलन करने के लिये पेड़ों द्वारा लिए जाने वाले कार्बन में बदलाव के तरीकों पर प्रयोग भी किया।

वैज्ञानिकों ने शोध में लिखा, ''इस प्रभाव के लिहाज से पतझड़ की भविष्यवाणी की सटीकता में 27 से 42 प्रतिशत तक का सुधार होता है। पहले शेष सदी के अंत में पतझड़ के 2 से 3 सप्ताह देर से आने का अनुमान था ,लेकिन अब उसके विपरीत इसके तीन से छह दिन पहले शुरू होने की संभावना है। ''

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