(उज्मी अतहर)
फिरोजाबाद (उप्र), 20 जून अगली दफ़ा जब आप किसी युवती या महिला के हाथों में या फिर दुकान पर चमचमाती चूड़ियों को देखें तो एक बार जलवायु परिवर्तन के बारे में जरूर सोचियेगा।
यह कल्पना से परे नहीं बल्कि लाखों मजदूरों की जीती-जागती हकीकत है, जो बढ़ते तापमान की मार और भट्टी से निकलती गर्मी को झेलने के साथ-साथ शरीर में कई बीमारियों को पालने के लिए मजबूर हैं।
'चूड़ियों के प्रसिद्ध शहर' फिरोजाबाद में कारीगर पीढ़ियों से भट्टी की गर्मी को झेलते हुए कांच से चूड़ियां बनाते रहे हैं। काम करने के लिए परिस्थितियां पहले से ही खतरनाक थीं और अब इन मजदूरों का नया दुश्मन है जलवायु परिवर्तन।
जलवायु परिवर्तन एक हजार करोड़ रुपये के इस उद्योग के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। इस उद्योग से करीब पांच लाख लोग अपनी गुजर बसर कर रहे हैं।
इस पारंपरिक उद्योग में काम करने वाली आस्था देवी पिछले एक महीने में दो बार अस्पताल में भर्ती हो चुकी हैं। आस्था को बार-बार शरीर में पानी की कमी की शिकायत से जूझना पड़ा और अब उन्हें लगता है कि न जाने कब तक उनका स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
आस्था (35) ने 'पीटीआई-' को बताया, ''ऐसा लगता है कि जैसे कि हम नरक में काम कर रहे हैं।''
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