देश की खबरें | नागरिकों के पास आग्नेयास्त्र रखने का कोई अपरिहार्य अधिकार नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, एक अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि संविधान या हथियार और गोला-बारूद के नियमन संबंधी कानून के तहत किसी नागरिक को आग्नेयास्त्र रखने का अपरिहार्य अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के एक आजीवन सदस्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त गारंटी के आधार पर गैर-निषिद्ध हथियार ले जाने के अधिकार का तर्क दूसरे उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका है।

अदालत ने कहा कि शस्त्र अधिनियम कानून का पालन करने वाले नागरिकों की आत्मरक्षा के लिए आग्नेयास्त्र रखने की आवश्यकता को संतुलित करने का प्रयास करता है, जबकि यह सुनिश्चित करता है कि खतरनाक असामाजिक तत्वों को हथियार उपलब्ध न हो पाएं।

अदालत ने कहा, “यह अच्छी तरह से तय है कि न तो संविधान और न ही अधिनियम नागरिकों को आग्नेयास्त्र रखने का कोई अपरिहार्य अधिकार प्रदान करता है। संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त गारंटी के आधार पर गैर-निषिद्ध हथियार ले जाने के अधिकार के तर्क को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पांच विद्वान न्यायाधीशों द्वारा विशेष रूप से खारिज कर दिया गया था।"

अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (लाइसेंसिंग) के कार्यालय द्वारा 2021 में जारी एक संचार पर सवाल उठाया, जिसमें धारा 3 (2) के अनुसार दो से अधिक आग्नेयास्त्र ले जाने या रखने पर रोक की बात कही गई थी।

इसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता सहित सभी लाइसेंसधारी दो से अधिक हथियार होने पर 15 दिन के भीतर क्षेत्र के थाने या अधिकृत हथियार डीलर के पास आग्नेयास्त्र जमा करने के लिए बाध्य होंगे।

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