ताइवान के राष्ट्रीय दिवस पर साई ने कहा कि चीन को ताइवान की बहुदलीय लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली को कमजोरी समझने और ‘‘ताइवान के समाज को विभाजित करने का प्रयास’’ करने की गलती नहीं करनी चाहिए।
साई ने कहा, ‘‘मैं बीजिंग के अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि सशस्त्र टकराव दोनों पक्षों के बीच पूरी तरह से कोई विकल्प नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘केवल हमारी संप्रभुता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता के प्रति ताइवान के लोगों की प्रतिबद्धता का सम्मान करके ही ताइवान जलडमरू मध्य में रचनात्मक बातचीत को फिर से शुरू करने की नींव रखी जा सकती है।’’
ताइवानी राष्ट्रपति ने कहा कि देश ने विदेशी हार्डवेयर का आयात बढ़ाकर तथा घरेलू शस्त्र उद्योग के पुनरुद्धार तथा हथियारों के लिए प्रशिक्षण को उन्नत करके चीन के खतरे से अपनी रक्षा करने की कोशिशों को मजबूत किया है।
साई के बयान के जवाब में, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने ताइवान के प्रति उसके तल्ख रुख को दोहराते हुए कहा, ‘‘ताइवान.... एक स्वतंत्र राज्य नहीं है और इसका कोई तथाकथित राष्ट्रपति नहीं है।’’
माओ ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ताइवान जलडमरूमध्य में मौजूदा तनाव का मूल कारण यह है कि (सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी) अधिकारी ताइवान की स्वतंत्रता पर कायम हैं और उकसावे के लिए बाहरी ताकतों के साथ साठगांठ कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम शांतिपूर्ण वार्ता के लिये तैयार हैं, लेकिन ताइवान की स्वतंत्रता के मकसद से अलगाववादी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
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